समाज से भेदभाव समाप्त करने का संकल्प

सूरजपुर | गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर वीएम कॉलेज ऑफ नर्सिंग, बिश्रामपुर में विद्यार्थियों व शिक्षकों द्वारा उनका स्मरण किया गया। सर्वप्रथम गुरु घासीदास के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। छात्रा अपराजिता ने कहा कि गुरु घासीदास ने अपने जीवन का अधिकांश समय छत्तीसगढ़ के जंगलों में बिताया और बाल्यकाल से ही समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को देखकर समानता पर आधारित जीवन दर्शन स्थापित किया। पूजा ने कहा कि गुरु घासीदास ने छुआछूत, भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए संघर्ष किया और सतनाम पर विश्वास, अहिंसा, नशा व जुआ से दूरी, मांसाहार त्याग और नैतिक जीवन को अपनाने का संदेश दिया। अंकिता ने बताया कि गुरु घासीदास ने सतनाम के सिद्धांत पर सतनामी समाज की स्थापना की, जिसका मूल भाव सत्य और समानता है। उन्होंने सत्य, अहिंसा, करुणा, सरलता और कर्म को जीवन का आधार बताया। कार्यक्रम के दौरान स्टाफ एवं विद्यार्थियों ने राज्य सरकार से गुरु घासीदास के नाम पर सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रारंभ करने की मांग की। अंत में सभी विद्यार्थियों ने गुरु घासीदास के बताए मार्ग पर चलने व समाज से छुआछूत और भेदभाव समाप्त करने का संकल्प लिया।

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