कांग्रेस का पलटवार
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर एमबीबीएस नामांकन प्रक्रिया की जांच सीबीआई से कराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में सभी नामांकन रद्द करते हुए फिर से काउंसलिंग हो। अनियमितता में संलिप्त अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाए। मरांडी ने दावा किया कि तीन अभ्यर्थियों का जाति और निवास प्रमाण पत्र गलत पाया गया है। जब गड़बड़ियों का अंदेशा अभ्यर्थियों को लगा, तब कुछ अभ्यर्थियों ने जेसीइसीइबी को आवेदन देकर नामांकन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों के जांच की मांग की। आईएएस अधिकारी अबु इमरान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी के जांच प्रतिवेदन में तीन अभ्यर्थियों सुचारिता दास, काजल और भिवानी का जाति एवं निवास प्रमाण पत्र गलत पाया गया। इनका प्रमाण पत्र उपायुक्त गोड्डा एवं उपायुक्त गिरिडीह ने निर्गत किया था। वहीं छह अन्य अभ्यर्थियों जिनका जेसीईसीईबी द्वारा मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के लिए सीटें आवंटित की गईं, इनका भी जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र फर्जी तरीके से बना था। जांच कमेटी ने कहा है कि प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए सभी अभ्यर्थियों तथा इस मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विस्तृत जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराई जानी चाहिए, लेकिन अब तक जांच कराने का निर्णय नहीं हुआ है। मेडिकल नामांकन पर राजनीति कर रहा विपक्ष : दुबे
प्रदेश कांग्रेस के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने मेडिकल नामांकन प्रक्रिया को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीखा पलटवार किया है। कहा कि बाबूलाल मरांडी को न तथ्य की चिंता है और न ही झारखंड की छवि की। आरोप लगाना उनकी आदत बन चुकी है। दुबे ने कहा कि मेडिकल एमबीबीएस नामांकन से जुड़ा विषय गंभीर है। लेकिन इसे राजनीतिक हथियार बनाकर राज्य सरकार और झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगी परीक्षा पर्षद की छवि धूमिल करने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि कहीं प्रक्रियात्मक त्रुटि सामने आती है तो उसकी जांच और सुधार राज्य सरकार स्वयं करती है।


