शहरी सरकार के अधिकारी सरकार की मंशा में खरे नहीं उतर रहे हैं। सरकार लोगों को समय पर पट्टे देने के लिए शहरी समस्या समाधान शिविरों का आयोजन कर रही है। शिविरों में पट्टे लेने वाले लोगों की भीड़ लगी हुई है, लेकिन लोगों को पट्टे नहीं मिल पा रहे हैं। निगम में शहरी शिविरों के बाद भी करीब 4 हजार से अधिक लोग पट्टों का इंतजार कर रहे हैं। ये लोग नगर निगम के जोनों में चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारी उन्हें संतुष्ट जवाब तक नहीं दे रहे हैं। पट्टे नहीं मिलने की वजह से लोगों बैंक लोन नहीं दे रही है। हालात यह है कि लोग निगमों के जोनों के चक्कर लगाकर थक गए हैं। इसके बावजूद वे तीन साल में पट्टे लेने कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। केस 1 जनता कॉलोनी के रहने वाले अशोक गुप्ता ने 18 मार्च 2023 में मालवीय नगर जोन में गौतम नगर टोंक रोड के प्लाट के पट्टे के लिए आवेदन किया था। दस्तावेज पूरा करने के बाद भी अधिकारी दो साल तक पट्टा जारी नहीं कर पाए। फाइल को दबा कर बैठे रहे। अब 21 नवम्बर 2025 को अधिकारियों ने फाइल को निरस्त कर दिया। पट्टे जारी करने की अपेक्षा गुप्ता पर करीब 3 लाख रुपए का यूडी टैक्स निकाल दिया। गुप्ता को अब मजबूरन कोर्ट जाना पड़ा। केस 3 टोंक रोड निवासी अशोक प्रकाश जैन ने तीन साल पहले 28 जुलाई 22 को मालवीय नगर जोन में सुमंगला जैन के नाम से पट्टा के लिए आवेदन किया। तीन साल पहले राशि भी जमा करा दी। जैन ने बताया कि जोन के बाबू राजेश बैरवा कभी फाइल गुम होने की बात कहता है तो कभी दस्तावेजों कमी होना बता रहा है, जबकि फाइल जोन में ही है। पट्टा बनकर तैयार है, लेकिन अधिकारी देने से मना कर रहे हैं। मुख्यालय तक के अधिकारियों को शिकायत कर चुके, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। केस 2 घाटगेट के छप्पर बंधो का मोहल्ला निवासी रजाउल्ला ने 16 मार्च 2022 को हेरिटेज निगम में पट्टे के लिए आवेदन किया था। दस्तावेज पूर्ण करने के बाद निगम ने अखबार में भी रजाउल्ला का नाम भी वर्ष 2022 में प्रकाशित कर दिया, लेकिन उन्हें अभी तक मकान का पट्टा नहीं मिला है। वे पट्टे के लिए निगम के आदर्श नगर जोन में अधिकारियों के पास चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें कल-परसो आने की बात कह रहे हैं। इसमें ही अधिकारियों ने दो साल निकाल दिया। ऐसे में अधिकारियों की मंशा पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। आखिर अधिकारियों की क्या मंशा है, जो पट्टा नहीं दे रहे। तीन साल से पट्टों के लिए नगर निगम में भटक रहे हैं लोग, अब दस्तावेजों में कमी बताकर किया कैंसिल


