3 अगस्त 2011 की वो सुबह भोपाल के इतिहास में दर्ज हो चुकी है। दिल्ली से एक छोटी-सी टीम राजधानी पहुंची थी। टीम का नेतृत्व कर रहे थे ‘मेट्रो मैन’ डॉ. ई. श्रीधरन, साथ में थे दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारी एस.डी. शर्मा और ट्रैफिक विशेषज्ञ मुखोपाध्याय। यह कोई औपचारिक दौरा नहीं था। यह तय करने की कोशिश थी कि क्या भोपाल में मेट्रो चल सकती है? श्रीधरन की कार सबसे पहले भदभदा ब्रिज पर रुकी। यहां से कार धीरे-धीरे चिकलोद रोड की ओर बढ़ी। सड़क की चौड़ाई, ट्रैफिक का दबाव, टर्न, बसावट, आबादी का फैलाव-हर चीज को उन्होंने जमीन पर उतरकर परखा। भोपाल को सिर्फ नक्शे में नहीं, सड़कों पर पढ़ा जा रहा था। भदभदा पहाड़ी के पास भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) की हरियाली देखकर श्रीधरन ने अधिकारियों से कहा- ‘मेट्रो डिपो इसी इलाके के आसपास होना चाहिए। करीब 25 एकड़ जमीन रिजर्व कीजिए।’ हालांकि, उस समय यहां डिपो के लिए जमीन तय नहीं हो पाई। बाद में सुभाष नगर अंडरब्रिज स्थित स्टड फार्म की जमीन डिपो के लिए चुनी गई। लेकिन उस पहली सलाह ने भोपाल मेट्रो की सोच और दिशा तय कर दी। इसी प्री-फिजिबिलिटी सर्वे के बाद करोंद से हबीबगंज का कॉरिडोर भोपाल मेट्रो का पहला रूट चुना गया। आगे चलकर यही कॉरिडोर एम्स तक बढ़ा। आज, 14 साल बाद, उसी सर्वे और उसी एक वाक्य की बुनियाद पर भोपाल मेट्रो पटरी पर दौड़ पड़ी है। आज से भोपाल में मेट्रो का असली सफर… भोपाल मेट्रो के ऑरेंज लाइन प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सुभाष नगर से एम्स के बीच रविवार सुबह 9 बजे से कमर्शियल रन शुरू हो गया है। यह वही रूट है, जिसकी कल्पना 2011 में की गई थी।
मेट्रो सफर अब पूरी तरह एयरपोर्ट जैसी प्रक्रिया से होगा। स्टेशन में प्रवेश से लेकर बाहर निकलने तक यात्रियों को 5 चरणों से गुजरना होगा- सुरक्षा जांच, टिकट/एक्सेस, प्लेटफॉर्म, यात्रा और एग्जिट। आज से एम्स से सुभाष नगर के बीच रोज 17 ट्रिप 300 किमी और बनते ही चीन के बाद सर्वाधिक मेट्रो रूट वाला देश होगा भारत भारत जल्द ही मेट्रो रेल नेटवर्क की कुल लंबाई के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मेट्रो के एम्स स्टेशन पर कहा कि देशभर में करीब 900 किमी मेट्रो परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में निर्माणाधीन हैं। इनमें से करीब 300 किमी नेटवर्क के जुड़ते ही भारत मेट्रो नेटवर्क की लंबाई में अमेरिका से आगे निकल जाएगा। खट्टर भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि भोपाल देश का 26वां शहर बन गया है, जहां मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। वर्तमान में भारत का मेट्रो नेटवर्क करीब 1,083 किमी का है, जो भोपाल में 7 किमी लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर के जुड़ने के बाद बढ़कर करीब 1,090 किमी हो गया है। वैश्विक परिदृश्य की बात करें तो चीन मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई के मामले में पहले स्थान पर है, जबकि करीब 1,400 किमी नेटवर्क के साथ अमेरिका दूसरे स्थान पर है। भारत तीसरे स्थान पर है, लेकिन निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूरा होने के साथ इसकी रैंकिंग में सुधार संभव है। भोपाल पहले चरण में ऑरेंज लाइन के तहत करीब 7 किमी लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर शुरू किया गया है। इस मौके पर सीएम डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। इंदौर-भोपाल प्रोजेक्ट साथ शुरू, आज कहां? इंदौर में और 11 किमी में मेट्रो चलने को तैयार इंदौर-भोपाल मेट्रो साथ शुरू हुईं, लेकिन इंदौर 7 महीने आगे निकला… अब वहां 11 किमी नया रूट भी तैयार इंदौर और भोपाल मेट्रो की शुरुआत लगभग एक साथ हुई थी, लेकिन व्यावसायिक संचालन के मामले में इंदौर ने भोपाल से करीब 7 महीने पहले बढ़त बना ली। जहां भोपाल में अब मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ है, वहीं इंदौर में अगले चरण की तैयारी तेज हो चुकी है और अगले साल 11 किमी नए रूट पर मेट्रो दौड़ने की संभावना है। इंदौर मेट्रो का उद्घाटन 31 मई 2025 को हुआ था। अब मेट्रो के फेज-1 का दूसरा और अहम हिस्सा रीच-2 अगले साल शुरू करने की तैयारी में है। करीब 11 किमी लंबे इस सेक्शन को पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। यह रूट सुपर कॉरिडोर-3 से मालवीय नगर चौराहा तक फैला है और इसमें 11 एलिवेटेड स्टेशन शामिल हैं। इस हिस्से पर सिविल और सिस्टम से जुड़े सभी प्रमुख काम पूरे हो चुके हैं। अब केवल आरडीएसओ (रेलवे डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन) और अन्य सुरक्षा संबंधी मंजूरियों का इंतजार है। आरडीएसओ को निरीक्षण के लिए पहले ही पत्र भेजा जा चुका है और जल्द ही निरीक्षण शुरू होने की संभावना है। यदि सभी स्वीकृतियां समय पर मिल जाती हैं, तो 2026 के शुरुआती चार महीनों में रीच-2 को व्यावसायिक रूप से शुरू किया जा सकता है। इंदौर में फेज-1 का पहला प्रायोरिटी सेक्शन गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर तक 6.3 किमी लंबा है। अब प्रशासन को उम्मीद है कि नए रूट के जुड़ने से इंदौर मेट्रो की उपयोगिता और यात्री संख्या दोनों में बढ़ोतरी होगी। वहीं, भोपाल की बात करें तो पहले फेज-1 में ही अभी कई बाधाएं हैं।


