विदिशा जिले के ग्राम उदयपुर में स्थित लगभग विश्व की सबसे विशाल, अखंडित और एकमात्र षष्ट-भुजाधारी नटराज प्रतिमा जल्द पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण बन सकती है। पुरातत्व विभाग और भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटैक) इस संरक्षित स्थल की खूबसूरती बढ़ाने के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में जुटे हैं। प्रतिमा के चारों ओर बड़े पैमाने पर लैंडस्केपिंग कर पौधारोपण किया जा रहा है। प्रवेशद्वार से प्रतिमा स्थल तक पिचिंग और फर्शीकरण के साथ दिशासूचक चिह्न लगाए गए हैं। हाल में पहाड़ी पर विशेष रोशनी की गई, जिसकी चमक दूर से दिखाई देती थी। इंटैक भोपाल चैप्टर के कन्वीनर मदनमोहन उपाध्याय के अनुसार, इंटैक ने इसे पर्यटन स्थल बनाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। रिसर्च में खुलासा… जिस मोनोलिथ पर प्रतिमा बनी, वो पहाड़ी का हिस्सा ही नहीं गांवों में खुलेंगे रोजगार के अवसर उपाध्याय ने बताया, शासन प्रचार करे तो यह स्थान विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बन जाएगा। पास के गांवों में होम स्टे, स्थानीय भोजन और गाइडिंग से रोजगार बढ़ेगा। विदिशा, भोपाल और सांची के पर्यटन सर्किट से इसे जोड़ सकते हैं। इंटेक यहां काम कर रहा है यह सही है कि भगवान शिव की नटराज की प्रतिमा पुरातत्वीय महत्व की है। पुरातत्व के महत्व को देखते हुए इंटेक यहां पर्यटन के लिए काम कर रहा है। -आशुतोष उपरीत, उपसंचालक पुरातत्व विभाग


