विश्व पर्यावरण संरक्षण मिशन ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मिशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा को एक ज्ञापन भेजा है।
इस ज्ञापन में अरावली के अंधाधुंध दोहन पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जिसे देश के पर्यावरण और भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बताया गया है। मिशन के प्रदेश कार्यक्रम प्रमुख गोपाल सिंह राव ने बताया कि अरावली पर्वतमाला हमारे जीवन का आधार है। यह जलवायु संतुलन, जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अरावली के अनियंत्रित दोहन से जनजीवन, जंगल और जलवायु बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। कानून बनाकर जल्द रोक लगाने की मांग
राव ने आरोप लगाया कि नेताओं और भू-माफियाओं को मिल रहे राजनीतिक संरक्षण के कारण अरावली का अंधाधुंध खनन और दोहन जारी है। मिशन ने अवैध माइनिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने और गैर-वानिकी कार्यों पर कानून बनाकर त्वरित रोक लगाने की मांग की है।
अरावली पर्वतमाला भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में गुजरात से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है। यह दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है। इसकी ऊंचाई, लंबाई और चौड़ाई में स्थान-स्थान पर भिन्नता है, जिसमें गुरु शिखर जैसी ऊंची चोटियां भी शामिल हैं। ‘अरावली का अस्तित्व ही संकट में पड़ा’
प्रदेश कार्यक्रम प्रमुख राव ने चिंता व्यक्त की कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों को पहाड़ नहीं मानने जैसी नीतियों के कारण अरावली का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। उन्होंने बताया कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के परिणामस्वरूप जल-प्लावन और पहाड़ों के स्खलन जैसी आपदाएं बढ़ रही हैं, जिनसे उत्तराखंड सहित देश के कई राज्यों में भारी जन-धन की हानि हो रही है। राव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अरावली का विनाश, भारत का विनाश है।” इसी को ध्यान में रखते हुए, मिशन ने सरकार से अरावली के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए कठोर कदम उठाने, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा हेतु सख्त कानून बनाने और उन्हें प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की है, ताकि जीव-जंतुओं के साथ-साथ आमजन के हित सुरक्षित रह सकें।


