महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम और स्वरूप में बदलाव के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी ने रविवार को बड़वानी में धरना-प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष नानेश चौधरी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन दोपहर 12:30 बजे जिला मुख्यालय स्थित पुराने कलेक्टर कार्यालय पर आयोजित किया गया। जिला अध्यक्ष बोले- नाम हटाना एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष नानेश चौधरी ने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महापुरुषों के नाम और विचारधारा को खत्म करने की कोशिश कर रही है। साथ ही केंद्र सरकार राज्यों पर आर्थिक बोझ डालकर अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव गरीबों के ‘काम के कानूनी अधिकार’ को कमजोर करने का प्रयास है। विधायक मंडलोई बोले- गांधी जी को मिटाया नहीं जा सकता कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने कहा कि भाजपा नाथूराम गोडसे के महिमामंडन की राजनीति के तहत गांधी जी की स्मृति को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसी योजना से गांधी जी का नाम हटाने से उन्हें देश की चेतना से अलग नहीं किया जा सकता। गांधी जी भारत के जन-जन में बसे हैं। मनरेगा एक कानून, सिर्फ योजना नहीं विधायक मंडलोई ने कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलनों से निकला कानून है। यह ‘हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो’ के सिद्धांत पर आधारित है। इस कानून ने ग्रामीणों को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को सशक्त किया और गांवों में विकास को मजबूती दी। कांग्रेसी बोली- नए बदलाव से खत्म होगी रोजगार की गारंटी कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नया प्रस्ताव रोजगार की कानूनी गारंटी को खत्म कर मांग आधारित अधिकार की जगह केंद्र नियंत्रित योजना लागू करना चाहता है। इससे न तो काम की गारंटी रहेगी और न ही समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा। आपदा या आर्थिक संकट के समय ग्रामीणों को रोजगार सुरक्षा भी नहीं मिलेगी। बजट कटौती और भुगतान में देरी का आरोप विधायक मंडलोई ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के पिछले 11 वर्षों में मनरेगा के बजट में लगातार कटौती की गई। हर साल 30 से 35 प्रतिशत तक बजट घटाया गया, जबकि मजदूरी में नाममात्र की बढ़ोतरी हुई। महंगाई बढ़ने के बावजूद मजदूरों की आय नहीं बढ़ी और भुगतान में देरी आम बात हो गई है। यूपीए सरकार का दौर याद दिलाया कांग्रेस ने कहा कि यूपीए सरकार के समय हर ग्रामीण परिवार को 100 दिन का गारंटेड रोजगार मिलता था। सड़क, तालाब, कुएं, जल संरक्षण और सूखा राहत जैसे काम कराए जाते थे। 15 दिन में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाता था। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा शासन में न काम मिल रहा है और न ही समय पर भुगतान हो रहा है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बाबूदादा कोटवाल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर यह प्रदर्शन किया गया है। कांग्रेस श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने वाली नीतियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर संघर्ष जारी रखेगी। कई नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद धरना-प्रदर्शन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष नानेश चौधरी, विधायक राजन मंडलोई, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बाबूदादा कोटवाल, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुभद्रा परमार, प्रदेश महासचिव गिरीश जायसवाल, युवक कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष सचिन यादव सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।


