पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अरावली को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि गहलोत अरावली को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। उनके साथ उनकी पार्टी भी नहीं हैं। गहलोत ने 18 दिसंबर को सोशल मीडिया पर ‘Save Aravalli’के नाम पर अभियान शुरू करके अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली थी। लेकिन ना तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, ना राहुल गांधी, ना मल्लिकार्जुन खड़गे और ना ही सचिन पायलट ने अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली। यह दर्शाता है कि जिस अभियान का दावा किया जा रहा है, उसमें स्वयं उनकी पार्टी का समर्थन भी उनके साथ नहीं है। इससे स्पष्ट है कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि राजनीतिक दिखावा है। गहलोत का 90 प्रतिशत अरावली खत्म होने का दावा झूठा
राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत का यह कहना कि 90 प्रतिशत अरावली समाप्त हो जाएगी, यह पूरी तरह से असत्य और भ्रामक हैं। अरावली का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हिरसा अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और आरक्षित वनों में आता है, जहाँ खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा, पूरे अरावली क्षेत्र में से केवल लगभग 2.56 प्रतिशत क्षेत्र ही सीमित, नियंत्रित और कड़े नियमों के तहत खनन के दायरे में आता है। गहलोत सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर रहे
राठौड़ ने कहा कि अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवम्बर को आदेश देते हुए अरावली के संरक्षण और खनन नियमन की रूपरेखा तैयार करते हुए अपने आदेश में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते कहा कि अरावली से जुड़े जिलों में स्थित कोई भी ऐसी भू-आकृति जो आसपास के भू-भाग से कम से कम 100 मीटर ऊंची हो उसे ‘अरावली हिल्स’ माना जाएगा। इससे पहले भी 8 अप्रैल 2005 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना में 100 मीटर से अधिक ऊंचाई को ‘हिल’ मानने का मानदंड तय किया गया। जिसे कांग्रेस सरकारों ने भी सालों तक लागू रखा था। लेकिन अब गहलोत सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर रहे हैं।


