मंडला में रविवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मनरेगा के नाम और स्वरूप में किए गए बदलावों के विरोध में था। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। गरीबों और गांधीवादी विचारधारा का अपमान कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना किसी विचार-विमर्श और विपक्ष को विश्वास में लिए बिना मनरेगा का स्वरूप बदल दिया है। पार्टी का कहना है कि महात्मा गांधी का नाम हटाना देश के करोड़ों ग्रामीण गरीबों और गांधीवादी विचारधारा का अपमान है। जिलाध्यक्ष बोले-11 वर्षों में मोदी सरकार ने मनरेगा को कमजोर किया कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले ने बताया कि लगभग 20 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में मनरेगा कानून संसद में सर्वसम्मति से पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि यह कानून ग्रामीण गरीबों, मजदूरों, किसानों और भूमिहीन परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी बना। इससे गांवों में ही काम मिला और मजबूरी में होने वाला पलायन रुका। डॉ. मर्सकोले ने यह भी कहा कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने मनरेगा को कमजोर करने का प्रयास किया है, जबकि कोरोना काल में यह योजना गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार ने मनरेगा का स्वरूप बदलकर यह तय करने का अधिकार दिल्ली में अपने हाथ में ले लिया है कि किसे, कहां और कितना रोजगार मिलेगा, जो जमीनी हकीकत से दूर है। इस फैसले का पुरजोर विरोध करने की घोषणा कांग्रेस ने इन बदलावों को किसानों, मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के हितों पर हमला बताया। पार्टी ने घोषणा की कि वह इस फैसले का पुरजोर विरोध करेगी। ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।


