पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर, कृषि व सामाजिक एकता का है प्रतीक : संजय

भास्कर न्यूज|लोहरदगा श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट व विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मकर संक्रांति हर वर्ष 14 जनवरी को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है, जो एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना मानी जाती है। मकर संक्रांति भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य सूर्य देव की पूजा और सकारात्मकता का आह्वान करना है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान सूर्य बारह राशियों के भ्रमण के दौरान जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार को सकरांत, लोहड़ी, टहरी, पोंगल आदि नामों से जानते हैं। इस दिन स्नान व दान का भी विशेष महत्व माना गया है। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश करते ही सूर्यदेव उत्तरायण हो जाते हैं और देवताओं के दिन और दैत्यों के लिए रात शुरू होती है। खरमास खत्म होने के साथ ही माघ माह भी शुरू हो जाता है। इसी के साथ मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते हैं। मकर संक्रांति को कृषि से भी गहरा संबंध है। यह समय फसलों की कटाई और नूतन फसलों की शुरुआत का होता है। किसानों के लिए यह समय खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है, क्योंकि वे अपनी मेहनत का फल प्राप्त करते हैं। इस दिन लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं, तिल और गुड़ का सेवन करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं भेजते हैं।

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