झाबुआ के राजगढ़ नाका स्थित गोड़ी पार्श्वनाथ मंदिर में रविवार को ‘मालवा स्तरीय विराट तेरापंथी श्रावक-श्राविका सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। यह आयोजन तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमणजी के शिष्य मुनि कोमलकुमार और मुनि सिद्धार्थकुमार के सानिध्य में हुआ। ‘नमस्कार महामंत्र’ के साथ शुरुआत सम्मेलन का शुभारंभ मुनि कोमलकुमारजी ने ‘नमस्कार महामंत्र’ के साथ किया। अपने प्रेरणादायी प्रवचन में मुनि ने कहा कि एक सच्चा श्रावक देव, गुरु और धर्म के प्रति पूर्ण समर्पित होना चाहिए। उन्होंने गुरु के प्रति कर्तव्य, गुरु की आज्ञा का पालन और सेवा को श्रावक का सच्चा धर्म बताया। मुनि सिद्धार्थकुमारजी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए जैन धर्म के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। इस दौरान अहमदाबाद से आए मुख्य प्रवक्ता विमल पितलिया ने श्रावक जीवन की आचार संहिता और कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की। ज्ञानशाला के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। तेरापंथ महिला मंडल झाबुआ ने मंगलाचरण किया और उपासक पंकज कोठारी ने ‘श्रावक निष्ठापत्र’ का वाचन किया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष मितेश गादिया ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। यह रहे उपस्थित सम्मेलन में मालवा के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए, जिनमें दाहोद, रतलाम, इंदौर, थांदला, पेटलावद, बामनिया, रायपुरिया, करवड़, सारंगी, राणापुर, उदयगढ़, बोरी, केसुर, कल्याणपुरा और झकनावदा के श्रावक-श्राविकाएं प्रमुख रूप से शामिल थे। मालवा कल्याण समिति के अध्यक्ष संजय गांधी और मंत्री अरुण श्रीमाल सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।


