नीतीश का हिजाब खींचना द्रौपदी चीरहरण जैसा:भोपाल के नायब शहर काजी बोले- राम-कृष्ण को मानने वाला ऐसा नहीं करता, यह दुर्योधन की सोच

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सार्वजनिक मंच पर एक महिला डॉक्टर का हिजाब खींचे जाने पर भोपाल के नायब शहर काजी मौलाना अली कदर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को देव मालाओं में वर्णित द्रौपदी के चीरहरण से जोड़ते हुए कहा कि राम और कृष्ण के आदर्शों को मानने वाला व्यक्ति ऐसी हरकत कर ही नहीं सकता। उनके मुताबिक यह कृत्य उस मानसिकता को दर्शाता है जिसे दुर्योधन का प्रतीक कहा जाता है। मौलाना ने साफ शब्दों में कहा कि यह न तो सियासी मुद्दा है और न ही साम्प्रदायिक, बल्कि यह सीधे-सीधे नारी की अस्मिता और सम्मान से जुड़ा हुआ सामाजिक सवाल है। यह सियासी नहीं, नारी की इज्जत का सवाल है
नायब शहर काजी मौलाना अली कदर ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक पद पर होने के कारण इस विषय पर चुप रहना उनके लिए मुमकिन नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी राजनीतिक दल या धर्म विशेष से जोड़कर देखने की भूल नहीं की जानी चाहिए। यह कोई सियासी मुद्दा नहीं है, न ही कोई कम्युनल विवाद है। यह एक सामाजिक मसला है, जो सीधे-सीधे एक औरत की इज्जत और उसकी अस्मिता से जुड़ा है।”उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां हिंदू, मुसलमान और तमाम धर्मों के लोग साथ रहते हैं। मुसलमान एक अल्लाह की इबादत करता है और हिंदू समाज, जो बहुसंख्यक है, नारी को देवी के रूप में पूजता है। ऐसे देश में यदि सार्वजनिक मंच पर किसी महिला के साथ इस तरह की हरकत होती है, तो यह पूरे समाज के लिए शर्मनाक है। द्रौपदी के चीरहरण की याद दिलाने वाला दृश्य
मौलाना अली कदर ने घटना के दृश्य पर गहरी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि जिस अंदाज में यह सब हुआ, वह बेहद तकलीफदेह है। “लोग मुस्कुरा रहे थे, मजाक उड़ाया जा रहा था और एक झटके में हिजाब खींच लिया गया। यह दृश्य मुझे उसी पसमंजर (पृष्ठ भूमि) में दिखाई देता है, जैसा हम देव मालाओं में द्रौपदी के चीरहरण के रूप में सुनते आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि राम और कृष्ण को आदर्श मानने वाला व्यक्ति कभी भी किसी महिला के सम्मान के साथ ऐसा खिलवाड़ नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा करता है, तो वह राम-कृष्ण की नहीं, दुर्योधन की सोच को मानने वाला ही हो सकता है। मौलाना ने इसे नैतिक पतन का प्रतीक बताया। हिजाब नहीं, हर महिला के सम्मान पर हमला
इस्लाम में हिजाब के महत्व को समझाते हुए मौलाना अली कदर ने कहा कि असल मुद्दा सिर्फ हिजाब का नहीं है। चाहे घूंघट हो, ओढ़नी हो या हिजाब, किसी भी महिला के पहनावे को सार्वजनिक रूप से खींचना या छूना उसकी अस्मिता पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में हिजाब मुस्लिम महिला की पहचान और उसकी आइडेंटिटी है। “यह उसका धार्मिक प्रतीक है, उसकी मर्यादा है। इस लिहाज से जो हुआ, वह बेहद दुखद और शर्मनाक है। ऐसा किसी भी हालत में नहीं होना चाहिए था। घटना की गूंज दुनिया के आखिरी किनारों तक
मौलाना अली कदर ने कहा कि इस घटना का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। आज पूरी दुनिया में इसकी गूंज है, खासतौर से इस्लामिक देशों और अरब मुल्कों में। उन्होंने बताया कि भारत के जिन देशों से रिश्ते हाल के वर्षों में और मजबूत हुए हैं, वहां भी यह खबरें चर्चा में हैं। मैं खुद देख रहा हूं कि अफ्रीका के आखिरी किनारों तक, मोरक्को जैसे देशों में भी इस घटना की खबरें लोकल लेवल पर चल रही हैं। इससे भारत की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है। मुस्लिम ही नहीं, हर समाज की महिलाओं में गुस्सा
घटना को लेकर समाज में फैली प्रतिक्रिया पर बोलते हुए मौलाना ने कहा कि यह गलत धारणा है कि सिर्फ मुस्लिम समाज में आक्रोश है। बहुसंख्यक समाज की महिलाएं भी उतनी ही आहत हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू महिलाएं भी इस बात से परेशान हैं कि इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति मंच पर एक महिला के साथ ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है। यह गुस्सा और दर्द हर उस औरत के दिल में है, जो अपने सम्मान को लेकर सजग है। संवेदनशीलता पर राजनीति हावी हो गई
मौलाना अली कदर ने माना कि ऐसे मामलों में अक्सर मानवीय संवेदनशीलता पीछे छूट जाती है और राजनीति हावी हो जाती है। इतना अनुभवी और सीनियर नेता यह जरूर समझता है कि इस तरह की हरकत का नकारात्मक असर क्या होगा। अगर इसके बावजूद यह सब हुआ, तो इसका मतलब यही है कि कहीं न कहीं सियासी रुझान हावी हो गए। “मजाक उड़ाते हुए, हुटिंग के बीच यह किया गया, जो बेहद अफसोसनाक है। कानून और न्याय व्यवस्था की असली परीक्षा
एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई पर मौलाना अली कदर ने कहा कि अब यह देश की न्याय व्यवस्था की परीक्षा है। जिस व्यक्ति ने यह किया, वह आज बहुत ताकतवर पद पर बैठा है। उन्होंने कहा कि अब देखना यह है कि जांच किस तरह होती है और कानून अपने मुताबिक फैसले करता है या नहीं। अगर निष्पक्ष जांच हुई और कानून के अनुसार कार्रवाई हुई, तभी लोगों का भरोसा कायम रहेगा। औरत को उसके लिबास की पूरी आजादी
मौलाना अली कदर ने अंत में कहा कि भारत का संविधान हर महिला को अपने पहनावे की आजादी देता है। कोई छोटे कपड़े पहनता है, कोई बड़े, कोई साड़ी पहनता है, कोई घूंघट करता है और मुस्लिम औरत हिजाब पहनती है। उन्होंने कहा कि यह महिला का निजी अधिकार है। कॉलेजों, स्कूलों में पहले ही इस मुद्दे पर परेशान किया जाता रहा है और अब इस स्तर पर ऐसी घटना होना हमारे सामाजिक मूल्यों से मेल नहीं खाता। जानिए आखिर पूरा मामला क्या है
CM नीतीश कुमार आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक महिला डॉक्टर नुसरत को पहले तो नियुक्ति पत्र दे दिया। इसके बाद उसे देखने लगे। महिला भी मुख्यमंत्री को देखकर मुस्कुराई। CM ने हिजाब की ओर इशारा करते हुए पूछा कि ये क्या है जी। महिला ने जवाब दिया, हिजाब है सर। CM ने कहा कि हटाइए इसे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथ से महिला का हिजाब हटा दिया। डिप्टी CM सम्राट चौधरी नीतीश कुमार को रोकने के प्रयास में उनकी आस्तीन खींचते हुए नजर आए। हिजाब हटाने से महिला थोड़ी देर के लिए असहज हो गई। आसपास मौजूद लोग हंसने लगे। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने महिला को नियुक्ति पत्र फिर थमाया और जाने का इशारा किया। महिला फिर वहां से चली गई। 3 तस्वीरों में समझिए पूरा घटनाक्रम इस घटना के बाद किसने क्या कहा… ये खबर भी पढ़ें… नायब शहर काजी बोले-जेहाद मतलब जंग नहीं,अच्छाई के लिए संघर्ष जहांगीराबाद स्थित इंडियन कॉफी हाउस में सोमवार को जागरूक मुस्लिम मंच द्वारा एक बेहद संवेदनशील विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। “इस्लाम में बलात्कार: सज़ा या सवाब?” शीर्षक से आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य था इस्लाम धर्म को बलात्कार जैसे जघन्य अपराध से जोड़ने की कोशिशों का पुरजोर खंडन करना। पढ़ें पूरी खबर…

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