भास्कर न्यूज |लुधियाना श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की शहादत की स्मृति को समर्पित कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से श्रद्धा और सेवा भावना के साथ मनाए जाते हैं। बीते करीब 15 वर्षों से शहर के अलग-अलग युवा सोसायटियां लंगर लगाकर पूरे एक सप्ताह तक शहीदी दिवस मनाती आ रही हैं। 21 दिसंबर से 28 दिसंबर तक किसी भी सिख परिवार में न तो कोई खुशी का उत्सव मनाया जाता है और न ही कोई मीठा पकवान बनाया जाता है। पूरा सप्ताह सिमरन, सेवा और शहादत की याद में बिताया जाता है। इस शहीदी सप्ताह की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसमें सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। शहादत की इस परंपरा में हिंदू परिवार भी बराबरी से लंगर सेवा करते हैं। लुधियाना के सलेम टाबरी इलाके में स्थित बाबा फतेह सिंह पार्क में पिछले करीब 20 वर्षों से हिंदू और सिख युवा मिलकर दिन-रात लंगर सेवा निभा रहे हैं। सेवा से जुड़े राजू चावला ने बताया कि शहीदी के इन दिनों में इलाके के सभी कारोबारी मिलकर लंगर सेवा में योगदान देते हैं। सुबह सबसे पहले चाय, रस, बिस्कुट और ब्रेड का लंगर लगाया जाता है। इसके बाद दोपहर से लेकर रात तक कढ़ी-चावल, दाल, सब्जी और परशादे संगत को छकाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस पार्क का नाम भी साहिबजादा बाबा फतेह सिंह के नाम पर रखा गया है। दुगरी नहर के पास मिशन सेवा सोसाइटी के युवा भी इस दौरान अनोखी सेवा करते हैं। ये युवा अपने रोजमर्रा के काम-धंधे से समय निकालकर शाम के समय दूध का लंगर लगाते हैं और साथ ही रास्ते में किसी भी वाहन को कोई दिक्कत आ जाए तो उसकी मरम्मत भी करते हैं। इशप्रीत सिंह ने बताया कि उनकी टीम में चार मैकेनिक शामिल हैं, जो कार, स्कूटर और मोटरसाइकिल की फ्री में मरम्मत करते हैं। पिछले 10 वर्षों से वे वेरका चौक से लेकर दोराहा तक यह सेवा निभा रहे हैं। वहीं हरप्रीत सिंह ने बताया कि शहीदी सप्ताह के दौरान वे शहर के अलग-अलग मॉल्स के अंदर चार साहिबजादों के स्वरूप सजाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को साहिबजादों के बलिदान और उनके गौरवशाली इतिहास से जोड़ना है। हरप्रीत सिंह ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी और बच्चों को अपने इतिहास की सही जानकारी मिलनी बेहद जरूरी है, ताकि वे शहादत, साहस और धर्म की असली भावना को समझ सकें। उन्होंने बताया कि मॉल्स में आने वाले बच्चों को चार साहिबजादों के जीवन, उनकी कुर्बानियों और माता गुजरी जी के त्याग के बारे में सरल भाषा में बताया जाता है। जो बच्चे साहिबजादों के बारे में जानकारी साझा करते हैं या सिमरन करते हैं, उन्हें विशेष रूप से उपहार (गिफ्ट्स) भी दिए जाते हैं, ताकि उनमें और अधिक रुचि पैदा हो और वे गर्व के साथ अपने इतिहास को जानें। हरप्रीत सिंह का कहना है कि इस पहल से बच्चों में न सिर्फ सिख इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, बल्कि उनमें सेवा, सिमरन और इंसानियत के संस्कार भी विकसित हो रहे हैं। इसी तरह बाबा मोती राम मेहरा पार्क में भी सुबह से लेकर रात तक दूध का लंगर लगाया जाता है। यह सेवा भी पिछले 20 वर्षों से लगातार चल रही है। अमन बग्गा ने बताया कि बाबा मोती राम मेहरा जी, जो एक हिंदू परिवार से थे, माता गुजरी जी और दोनों साहिबजादों को पोह महीने की कड़ाके की ठंड में अपने घर से दूध पहुंचाया करते थे और रोजाना उनकी सेवा करते थे। उनकी इसी महान सेवा और बलिदान को याद करते हुए इस पार्क का निर्माण किया गया था। तब से हर साल शहीदी दिवस के अवसर पर यहां सुबह से शाम तक दूध का लंगर चलता है।


