पेंच टाइगर रिजर्व से लगभग 600 किमी दूर राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व तक बाघिन पी-124 का हवाई ट्रांसलोकेशन किया गया। यह अभियान रविवार शाम 5:30 बजे वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से संपन्न हुआ। यह मप्र और राजस्थान के बीच पहला अंतरराज्यीय हवाई बाघ ट्रांसलोकेशन है। बाघिन को 5 दिसंबर को पेंच में रेडियो कॉलर पहनाकर छोड़ा गया था, ताकि उसकी गतिविधियों पर वैज्ञानिक निगरानी रखी जा सके। ट्रांसलोकेशन की सूचना मिलते ही पेंच प्रबंधन ने बाघिन की ट्रैकिंग और रेस्क्यू प्रक्रिया शुरू कर दी। डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि 40 लोगों की टीम ने जंगल में ट्रेक कर बाघिन को सुरक्षित रेस्क्यू किया। मेडिकल के बाद बाघिन को होश में लाया गया और विशेष रूप से तैयार किए गए पिंजरे में रखा गया। सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बाघिन का वायुसेना के हेलीकॉप्टर से ट्रांसलोकेशन किया गया। 2009 में ऐसा हुआ था… मार्च 2009 में कान्हा टाइगर रिजर्व से पन्ना टाइगर रिजर्व में दो बाघिनों टी-1 और टी-2 का पुनर्वास किया गया। इनके स्थानांतरण के लिए भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर का उपयोग हुआ। यह देश का पहला सफल हवाई बाघ पुनर्वास अभियान था।


