गुरदासपुर में गड्ढे को लेकर विवाद:MLA और जिला प्रशासन में खींचतान, विधायक ने फिर शुरू करवाया काम,NOC बनी विवाद की जड़

पंजाब के गुरदासपुर के तिब्बड़ी रोड पर भाई लालो चौक के निर्माण को लेकर जिला प्रशासन और स्थानीय विधायक के बीच विवाद लगातार बढ रहा है। शनिवार को प्रशासन ने चौक निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे को भरने का प्रयास किया तो स्थानीय लोगों ने विरोध किया। विधायक बरिंदरजीत सिंह पहाड़ा और नगर कौंसिल प्रधान एडवोकेट बलजीत सिंह पहाड़ा के नेतृत्व में लोगों ने गड्ढे से मिट्टी निकालकर निर्माण कार्य फिर से शुरू करवा दिया। NOC को लेकर विवाद की जड़
भाई लालो चौक के निर्माण विवाद की जड़ NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) है। जिला अधिकारियों का कहना है कि कोई NOC जारी नहीं की गई है, जबकि नगर कौंसिल और विधायक का दावा है कि सभी आवश्यक NOC प्राप्त हैं और दावा किया है कि 15.40 लाख का टेंडर भी पास हो चुका है। करीबन एक महीने पहले गड्ढे को खोदा गया। वहीं जिला प्रशासन कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। विधायक दाह संस्कार बीच में छोड़कर मौके पर पहुंचे
विधायक पहाड़ा ने बताया कि उनकी पत्नी के चाचा का शनिवार को संस्कार था, लेकिन उन्हें सूचना मिली कि प्रशासन राजनीतिक दवाब में चौक निर्माण रोक रहा है। उन्होंने संस्कार बीच में छोड़कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आस पास के लोगों की मांग पर चौक का निर्माण करवाया जा रहा है।
नगर कौंसिल प्रधान एडवोकेट बलजीत सिंह पहाडा़ ने बताया कि उक्त चौक निर्माण के लिए सभी एनओसी लेने के बाद 15.40 लाख रुपए का टेंडर लगा कर काम शुरू किया गया है। लोगों ने विरोध में किया जाम गुरदासपुर में भाई लालो चौक निर्माण को लेकर विवाद चरम पर है और बढते हुए विवाद के कारण लोगों ने चौक के रास्ते को चारों तरफ से जाम कर दिया।जिसके कारण शहर के कई हिस्सों में जाम की स्थिति बन गई और स्थानीय लोगो को काफी देर तक परेशानी उठानी पडी। डीसी गुरदासपुर उमा शंकर गुप्ता बोले मामले सबंधी जब डीसी गुरदासपुर उमा शंकर गुप्ता से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यह मामला एडीसी जनरल देख रहे है। उनसे संपर्क किया जाए। जब मामले संबंधी एडीसी जनरल हरजिंदर सिंह के साथ संपर्क किया गया तो उन्होंने दावा किया कि नगर कौंसिल के पास चौक निर्माण के लिए एनओसी नहीं है। अगर एनओसी है तो उन्हें दिखाए। बढ़ता विवाद लोगों के लिए समस्या विवाद एक बार फिर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी को उजागर करता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस तरह से सुलझता है और इस मामले में प्रशासन और विधायक किस तरह से आगे बढ़ते हैं।

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