16 दिसंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला एफआईआर पर आधारित नहीं है, बल्कि एक निजी शिकायत पर शुरू हुआ था, इसलिए ED की शिकायत पर आगे की कार्रवाई नहीं हो सकती। इससे सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों के लिए बड़ी राहत मिली है।कोर्ट के इस फैसले के बाद भोपाल में पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर लीडर बीके हरिप्रसाद ने पीसीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। शिवराज को दिल्ली का क्लाइमेट शूट नहीं कर रहा
कर्नाटक में सीएम को लेकर सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान को लेकर हरिप्रसाद ने कहा- आप कर्नाटक का छोड़ दीजिए, मप्र की भी बात कर लीजिए। शिवराज सिंह की भी बात कर लीजिए, बेचारे को दिल्ली का क्लाइमेट सूट नहीं कर रहा।
दिल्ली में बहुत पॉल्युशन है। पॉलिटिकल पॉल्यूशन भी है, नेचुरल पॉल्यूशन भी है। इधर मप्र में तो वे राजा थे, बेचारे को उधर भेज दिया अच्छे आदमी थे। पढ़िए हरिप्रसाद से भास्कर की बातचीत हरिप्रसाद: वो कोशिश खूब कर रहे हैं लेकिन ये (बीजेपी लीडरशिप) पसंद नहीं कर रहे। वो तीन -चार टर्म कोई दंगा फसाद करके मुख्यमंत्री नहीं बने थे। लोगों के बीच में सच हो, झूठ हो, कुछ कार्यक्रम हो न हो। वे शामिल रहते थे। लोग क्या-क्या करके वहां बैठे हैं इसे वो नेचुरली फील करते होंगे। हरिप्रसाद: महात्मा गांधी के नाम से नरेन्द्र मोदी और आरएसएस को कोई प्यार नहीं हैं। इन्हें महात्मा गांधी से कोई प्यार नहीं हैं। जब मोदी जी पार्लियामेंट में आए थे उस पार्लियामेंट में हम भी थे। कांग्रेस ने एक स्मारक गढ्ढ़ा खोदने के लिए बनाया है। इससे समझ सकते हैं कि वो पहले दिन से मनरेगा के खिलाफ थे। कोरोना के टाइम में 40 लाख लोग मरे थे। अगर रोजगार नहीं देते तो ये आंकड़ा डबल हो जाता। कोरोना के टाइम में इसी मनरेगा ने लोगों को बचाया है। इन लोगों ने महात्मा गांधी को जीवित खत्म किया है। उनके आदर्शों को खत्म करने की भी ये लोग कोशिश कर रहे हैं। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को पूरा करने के लिए हम लोग मनरेगा लाए। मनरेगा के नाम से छोडि़ए जो गरीब प्रताड़ित होगा। गरीब के खिलाफ ये लोग जो कानून लाए हैं। उसके खिलाफ हमारा विरोध है। ये लोग महात्मा गांधी के नाम के खिलाफ हैं। उसे खत्म करने का कोशिश और साजिश 140 साल से चल रही है। हम उसके खिलाफ लड़ रहे हैं।
आप देख लीजिए नोटबंदी हुई और कहा कि देश में बहुत सुधार हो जाएगा। उग्रवाद, भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा। इन लोगों ने सुधार के नाम पर जो भी किया है चाहे जीएसटी हो या नोटबंदी हो। हरिप्रसाद: राजनीति में मतभेद रहना जरूरी है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। भाजपा में नहीं है क्या? बिहार से एक अध्यक्ष बना दिया। उसका कोई जिक्र नहीं होता। कर्नाटक को लेकर जो भी कन्फ्यूजन है वो मीडिया में है। जो भाजपा की स्थिति कर्नाटक में है एक आदमी खुलेआम बोलता है कि भाजपा में मुख्यमंत्री बनने के लिए ढ़ाई हजार करोड़ रुपया देना है। मंत्री बनने के लिए सौ करोड़ देना है। उससे पूछ लीजिए भाजपा का हाल क्या है? भाजपा का प्रेसिडेंट और नेता प्रतिपक्ष है वो विपक्ष के का काम नहीं कर रहा। जो हमारा अंदरूनी मामला है ये तो नाली में मछली पकड़ने जा रहे हैं। आप कर्नाटक का छोड़ दीजिए, मप्र की भी बात कर लीजिए। शिवराज सिंह की भी बात कर लीजिए बेचारे को दिल्ली का क्लाइमेट सूट नहीं कर रहा। दिल्ली में बहुत पॉल्युशन है। पॉलिटिकल पॉल्यूशन भी है, नेचुरल पॉल्यूशन भी है। इधर मप्र में तो वे राजा थे, बेचारे को उधर भेज दिया अच्छे आदमी थे। हरिप्रसाद: कमलनाथ जी का मामला अलग है। वो किसी भी क्लाइमेंट में एडजस्ट हो सकते हैं। वो दिल्ली के क्लाइमेट में एडजस्ट हो सकते हैं। इधर मध्य प्रदेश में भी हो सकते हैं, महाराष्ट्र में भी हो सकते हैं, उधर दक्षिण भारत में भेज देंगे तो वहां के क्लाइमेट में भी एडजस्ट हो सकते हैं। हरिप्रसाद: कांग्रेस का एक संप्रदाय है जो भी मुख्यमंत्री डिप्टी सीएम बनता है एमएलए चुनने के बाद अपनी राय देते हैं। उसके बाद हाई कमांड तय करता है। कांग्रेस में यह छूट है, प्रजातंत्र में फ्रीडम और स्पीच है लेकिन वो हक और ताकत भाजपा में नहीं हैं। वो डायरेक्शन बीजेपी में नागपुर से आते हैं। हरिप्रसाद: मजबूती के साथ सब काम कर रहे हैं। गुटबाजी हर पार्टी में है वैसी ही हमारी पार्टी में भी है। हरिप्रसाद: मोहन भागवत कब कहां क्या बोलते हैं वो समझ नहीं आता। मैं पहली बात तो यह पूछना चाहता हूं कि ये आदमी कौन है? आरएसएस का सरसंघचालक है। क्या ये रजिस्टर्ड संगठन है? रजिस्टर्ड ऑर्गेनाइजेशन नहीं हैं, उन्हें जेड प्लस सिक्योरिटी क्यों दी गई? हमारे टैक्स के पैसे से उन्हें जेड प्लस सिक्योरिटी क्यों है? उन्होंने ऐसा कौन सी तोप मार दी इस देश के लिए? असंवैधानिक रूप से अनरजिस्टर्ड ऑर्गेनाइजेशन को पूरा महत्व दे रहे हैं। मोहन भागवत ने बिहार चुनाव में 2015 में कहा था कि हम आरक्षण खत्म कर देंगे। तो बिहार में लोगों ने बीजेपी को खत्म कर दिया। उसके बाद आरक्षण की बात छोड़ दी। गोलवलकर का विचार देख लीजिए जो भी हिन्दुस्तान में रहता है वो हिन्दू है हिन्दू राष्ट्र का है। ये डबल स्टेंडर्ड हैं अभी प्रधानमंत्री भी माइनोरिटीज के खिलाफ मीट, मछली मंगलसूत्र, ट्रिपल तलाक, कपड़ा देखकर पहचानों और फिर अरब में जाकर सबके गले मिलते हैं। अरब जो देता है वो लेकर आते हैं।
एक लेडी बीजेपी की एक प्रवक्ता थी मैं उसका नाम नहीं लूंगा उन्होंने माइनॉरिटी के खिलाफ टिप्पणी कर दी। उसके बाद वेंकैया नायडू मिडिल ईस्ट गए उन्हें रि-ग्रेट करना पड़ा। इन लोगों का सोच गिरगिट की तरह बदलता रहता है। हरिप्रसाद ने कहा- शिवराज सिंह छोटे आदमी हैं मोहन भागवत सब कुछ हैं। वो जो बोलेंगे वही बीजेपी में फाइनल है। बीजेपी को हमारे यूथ कांग्रेस वाले बाएं हाथ का खेल है। आरएसएस का जो है वो पूरे देश में चल रहा है ये जानवरों के डॉक्टर हैं तो इंसानों के बारे में क्यों बात करते हैं। शायद उन्होंने गलती कर दी है जानवरों को जो सिस्टम है एनाटॉमी उसे देखकर बोले होंगे। इंसानों के बारे में उन्हें इतना आइडिया नहीं हैं। हरिप्रसाद: हिन्दू संगठन के नाम पर ये धब्बा है। जो आर्टिकल 91ए फ्रीडम ऑफ स्पीच के तहत पूरी छूट देता है। आर्टिकल 92ए उसको निर्बन्ध करने की ताकत भी सरकार को देता है। भाजपा की आदत है कुछ सिलेक्टिव पढ़ने की और बाकी भूल जाने की। आर्टिकल 91ए में जो बोलना है वो बोल सकते हैं। लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच को निर्बन्ध करने के लिए अगर हम लोग बिल लाए हैं तो सुप्रीम कोर्ट ने बहुत सीरियस आदेश दिया था उसके फॉलोअप में हम लोग लाए हैं। क्योंकि हमारे मेनिफेस्टो में कहा था कि हम कम्युनलिज्म और हेट स्पीच को रोकेंगे।
हर तबके के लोगों का भारत एक खूबसूरत गुलिस्तां है।


