भोपाल में बनेगी MP की सबसे ऊंची बिल्डिंग:स्कूल शिक्षा विभाग से लेकर कॉरपोरेट दफ्तर होंगे, राजगढ़ और नरसिंहपुर में स्टूडेंट्स करेंगे गाय पर रिसर्च

मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार अब सिर्फ किताब, यूनिफॉर्म और शिक्षकों तक सीमित नहीं रहना चाहती। राजधानी भोपाल में बनने वाली प्रदेश की सबसे ऊंची सरकारी इमारत से लेकर गाय पर शोध तक की योजनाओं की झलक स्कूल शिक्षा विभाग ने दिखाई है। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन विभाग मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकार बच्चों को जन्म से लेकर 12वीं तक सिर्फ पढ़ाने का नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने का काम कर रही है। ड्रॉपआउट रोकने, मुफ्त किताबों, लैपटॉप-स्कूटी वितरण, शिक्षकों की भर्ती से आगे बढ़कर अब शिक्षा विभाग अपने दफ्तरों के लिए 22 मंजिला इमारत और राजगढ़ और नरसिंहपुर में संस्कृत विद्यालयों में गाय आधारित शोध जैसी नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। मंत्री के मुताबिक, अगर ये प्रयोग सफल हुए तो मध्यप्रदेश देश के लिए मॉडल बन सकता है। 32 हजार शिक्षकों की होगी भर्ती
आगामी 2 वर्षों में उच्च माध्यमिक विद्यालयों में व्यवसायिक शिक्षा प्रारंभ करने की योजना है। शिक्षकों एवं प्राचार्यों के परिश्रम से बोर्ड परीक्षाओं का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। 275 सांदीपनि एवं 799 पीएमश्री विद्यालयों को मॉडल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी उदाहरणीय स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है। 67 हजार से अधिक बालक-बालिकाओं को प्रारंभिक स्तर तक की पढ़ाई के साथ ही आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया है। 32 हजार शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। 76 हजार अतिथि शिक्षकों को 1 जुलाई को विद्यालयों में जॉइन कराया है। देश की नींव को संभालने का दावा
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि बच्चा जन्म के बाद सबसे पहले स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़ता है। 12वीं पास करते-करते वह एक जिम्मेदार युवा बन चुका होता है। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग उस वर्ग को संभालता है, जो देश की असली नींव है। इसी वजह से सरकार और विभाग दोनों इस जिम्मेदारी को लेकर सजग हैं और बीते दो सालों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार फैसले लिए गए हैं। मंत्री सिंह ने कहा कि अगले तीन वर्षों में 100% बुनियादी साक्षरता का लक्ष्य तय किया है। स्कूलों में सीट क्षमता बढ़ाने, आईसीटी लैब, एनसीसी के विस्तार, शिक्षक प्रशिक्षण और पीपीपी मॉडल के जरिए शिक्षा ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। कक्षा पहली में घटती दाखिला दर पर काबू
मंत्री ने बताया कि कुछ साल पहले तक कक्षा पहली में दाखिला दर लगातार गिर रही थी, जो चिंता का विषय बन गई थी। लेकिन अब इस ट्रेंड को कंट्रोल कर लिया गया है और आंशिक रूप से इसमें बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। विभाग की कोशिश रही है कि बच्चों को स्कूल से जोड़े रखने के लिए बुनियादी सुविधाएं समय पर मिलें। अप्रैल में किताबें, परिवारों पर बोझ कम
सरकार द्वारा हर साल छात्रों को मुफ्त किताबें दी जाती हैं। मंत्री ने बताया कि पिछले साल अप्रैल महीने में ही किताबें बच्चों तक पहुंचा दी गईं, ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई प्रभावित न हो। पहले किताबें देर से मिलने पर कई बच्चों को बाजार से किताबें खरीदनी पड़ती थीं, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था। अब विकासखंड स्तर पर बुक फेयर
इस साल सरकार एक कदम और आगे बढ़ने जा रही है। मंत्री ने घोषणा की कि विकासखंड स्तर पर बुक फेयर आयोजित किए जाएंगे। इससे सरकारी ही नहीं, निजी स्कूलों के छात्र भी सरकार द्वारा तय न्यूनतम दरों पर महंगी किताबें खरीद सकेंगे। इसका मकसद शिक्षा को सुलभ और किफायती बनाना है। मंत्री सिंह के अनुसार, विकास और सेवा के दो वर्ष में 49 पुस्तकों का स्थानीय भाषाओं के समावेश के रूप में राज्य द्वारा प्रदेश की 12 भाषाओं जैसे बुंदेली, बघेली, मालवी, निमाड़ी आदि में तैयार कर उपलब्ध कराया जा रहा है। आरटीई छात्रों की फीस सीधे खातों में
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के करीब साढ़े आठ लाख बच्चे आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इन सभी छात्रों की फीस की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की गई है, ताकि स्कूल और अभिभावकों के बीच किसी तरह की परेशानी न हो। ड्रॉपआउट दर शून्य तक पहुंचाने का दावा
सरकार ने 2024-25 में प्राथमिक विद्यालयों की ड्रॉपआउट दर को 6 प्रतिशत से घटाकर शून्य तक पहुंचाने का दावा किया है। इसी के साथ 94 हजार छात्रों को लैपटॉप और 7,800 छात्रों को स्कूटी दी गई है, ताकि पढ़ाई के साथ तकनीक और आवाजाही की दिक्कत दूर हो सके। मंत्री सिंह ने कहा कि साल 2024-25 में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 6.8% से घटकर शून्य हो गई है। यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में प्रदेश में शिक्षा का माहौल बेहतर हुआ है। प्रवेश उत्सव के माध्यम से स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। यूनिफॉर्म, शिक्षक और आत्मरक्षा
सरकार की योजना है कि जैसे सांदीपनि स्कूलों में सिली-सिलाई यूनिफॉर्म मिलती है, वैसे ही सभी सरकारी स्कूलों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण यूनिफॉर्म दी जाए। इसके अलावा 32 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। 24 हजार शिक्षकों को योग्यता अनुसार पदोन्नति दी गई है और 36 हजार अतिथि शिक्षकों की ज्वाइनिंग कराई जा चुकी है। साथ ही 67 हजार छात्र-छात्राओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है। 22 मंजिला भवन, शिक्षा विभाग का नया चेहरा
सबसे चौंकाने वाला ऐलान भोपाल में 22 मंजिला भवन को लेकर रहा। मंत्री ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग के सभी दफ्तरों को एक ही छत के नीचे लाने के लिए मध्यप्रदेश की सबसे ऊंची सरकारी बिल्डिंग बनाई जाएगी। इस भवन का व्यवसायिक उपयोग भी किया जाएगा, जिससे आय अर्जित हो सके। मुख्यमंत्री ने इसे एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में लक्ष्य दिया है।

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