मंदिर दर्शन के बहाने बुजुर्ग महिलाओं को ऑटो में बैठाकर उनके सोने के गहने लूटने वाली शातिर अंतरराज्यीय गैंग का जयपुर साउथ पुलिस ने खुलासा किया। यह गिरोह मूल रूप से भावनगर गुजरात से जुड़ा है। पिछले तीन वर्षों से जयपुर, दिल्ली व गुरुग्राम में सक्रिय था। पुलिस ने गैंग के दो वांछित आरोपियों को तिहाड़ जेल दिल्ली से कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू की है। गिरोह के बदमाश पहले मंदिरों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रैकी करते थे। बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाकर उन्हें ऑटो में बैठाया जाता। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी वारदात से पहले मातारानी (जोगमाता) से मन्नत मांगते थे। सफल वारदात के बाद मन्नत पूरी होने पर मातारानी को भोग चढ़ाया जाता था। वारदात के बाद आरोपी ऑटो को पार्किंग में छोड़कर बस या ट्रेन से दिल्ली फरार हो जाते थे। एक दिन में दो वारदातें की थी
शिप्रापथ निवासी संगीता नंदवानी (66) ने विधायकपुरी थाने में 1 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि 30 जून को अमरापुरा मंदिर दर्शन कर घर लौटते समय वह बेटे के साथ ऑटो में सवार हुई थीं। ऑटो में पहले से दो सवारी मौजूद थीं। कुछ दूरी पर एक और व्यक्ति ऑटो में बैठा। इसके बाद तीनों ने मिलकर उनके साथ मारपीट कर करीब 60 ग्राम वजनी सोने के दो कंगन लूट लिए और उन्हें रास्ते में उतारकर फरार हो गए। वहीं इसी दिन दूसरी पीड़िता हेमलता वासवानी (56) ने भी यह रिपोर्ट दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि वहदेवरानी के साथ अमरापुरा मंदिर से लौट रही थीं। ऑटो से उतरने के बाद उन्हें पता चला कि उनके हाथ से 28 ग्राम का सोने का कंगन गायब है। ऑटो हरे-पीले रंग का था, जिस पर “बियानी कॉलेज” और “कद बढ़ाएं” लिखा हुआ था। इन मामलों में थाना विधायकपुरी में मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू की गई। तिहाड़ जेल से आरोपी कस्टडी में
डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया- घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की। टीम ने जयपुर, दिल्ली और गुरुग्राम में व्यापक स्तर पर तलाश और तकनीकी अनुसंधान किया। पूर्व में गिरफ्तार आरोपी गोविंद राजकोटिया और अश्विन मीठापुरा से मिली जानकारी के आधार पर गैंग के वांछित सदस्य रवि भाई और दिलीप भाई की लोकेशन का पता लगाया गया। सूचना मिली कि दोनों आरोपी वर्तमान में तिहाड़ जेल दिल्ली में डिटेन हैं, जिसके बाद पुलिस टीम ने उन्हें कस्टडी में लिया। ऑटो चलाकर रैकी, फिर लूटा
जांच में सामने आया कि गैंग का मुख्य सरगना गोविंद राजकोटिया साल 2014 से जयपुर में रहकर ऑटो चलाता था। शहर की भौगोलिक जानकारी का फायदा उठाता था। वह गुजरात से अपने परिवार व गांव के साथियों को बुलाकर गिरोह बनाता और वारदातों को अंजाम देता। बदमाश पहले ऑटो में सवारी बैठाते। फिर कुछ दूरी पर गैंग के अन्य बदमाश बहाने से ऑटो रुकवाते। फिर धक्का-मुक्की कर कटर की मदद से सोने के गहने काट लेते और पीड़िता को रास्ते में उतारकर फरार हो जाते। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों की जांच में जुटी है और और भी खुलासों की संभावना जताई जा रही है।


