बिलासपुर रोड पर साड़वार बैरियर के पास वन विभाग ने दो दशक पहले करीब पांच हेक्टेयर में स्मृति वन वाटिका विकसित की थी। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण के लिए प्रेरित करना था। वाटिका में लाखों रुपए खर्च कर स्थल का समतलीकरण, पौधरोपण और लोगों के सैर-सपाटे के लिए इसे पार्क के तौर पर विकसित किया गया। वाटिका तैयार करने के दौरान करीब 500 पेड़ लगाए गए थे। यह जगह शहरवासियों के लिए शांत, हरित और यादों से जुड़ा स्थल बनने की उम्मीद जगा रहा था। अब समय बीतने के साथ स्मृति वन वाटिका वन विभाग की उदासीनता का शिकार हो गया है। हालत यह है कि वाटिका नशेड़ियों का अड्डा बनकर रह गई है। पार्क की सुरक्षा और रखरखाव पर ध्यान न देने से यह असुरक्षित और बदहाल हो चुका है। ^स्मृति वन वाटिका में पौधरोपण किया गया है। आगे और भी पौधे लगाए जाएंगे। स्थल पर मौजूद कमियों को दूर कर दोबारा लोगों के घूमने-फिरने लायक बनाया जाएगा। विभाग की ओर से आवश्यक सुधार की योजना है। अभिषेक जोरावत, डीएफओ, सरगुजा वॉच टॉवर की सीढ़ियां जंग लगने से जर्जर, बढ़ा खतरा पार्क असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। टीम जब पार्क के अंदर पहुंची, तो कुछ युवक नशा करते दिखाई दिए। पार्क में निगरानी और सुरक्षा के लिए बनाए गए वॉच टॉवर की लोहे की सीढ़ियां जंग लगने से जर्जर हो चुकी हैं। सीढ़ियों पर झाड़ियां उग आई हैं, जिससे वहां तक पहुंचना भी खतरे से खाली नहीं है। लोगों के बैठने के लिए लगाए गए बेंच भी टूट-फूटकर बदहाल अवस्था में पड़े हैं। लकड़ी से बनी कलात्मक मूर्तियां, जो वाटिका की पहचान थीं, दीमक लगने से खराब हो चुकी हैं। इनमें त्रिदेव की मूर्ति भी शामिल है, जो कभी लोगों को आकर्षित करती थी, अब यह टूट-फूट और उपेक्षा की तस्वीर पेश कर रही हैं।


