प्रकाश मिश्रा|गिरिडीह गिरिडीह जिले में सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। परिवहन विभाग के आंकड़े बेहद चिंताजनक स्थिति को उजागर करते हैं। जिले में कुल 7 लाख 36 हजार 595 वाहन पंजीकृत हैं, जबकि केवल 1 लाख 9 हजार 138 लोगों के पास ही ड्राइविंग लाइसेंस है। इसका मतलब यह है कि करीब 85 प्रतिशत से अधिक वाहन ऐसे चालक सड़कों पर दौड़ा रहे हैं, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। जबकि मात्र 14.81 प्रतिशत लोगों के पास ही लाइसेंस है। स्थिति और गंभीर इसलिए है क्योंकि जिले में कुल 3 लाख 38 हजार 931 बाइक पंजीकृत हैं। सड़क हादसों में सबसे अधिक मौतें इन्हीं दोपहिया वाहन चालकों की हो रही हैं। बाइक सवारों की संख्या अधिक होने और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हादसों में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों को ट्रैफिक नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। हेलमेट न पहनना, तेज रफ्तार, खतरनाक ओवरटेकिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना आम हो चुका है। इन लापरवाहियों का सीधा असर सड़क दुर्घटनाओं पर पड़ रहा है। आंकड़े बताते हैं कि सड़क हादसों में मरने वालों में करीब 70 प्रतिशत से अधिक दोपहिया वाहन चालक होते हैं, जो सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं करते। सड़क हादसों में मौत के बाद पीड़ित परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या मुआवजा प्राप्त करने की होती है। विशेषकर जब दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता, तो आश्रितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। जानकारी के अनुसार करीब 60 प्रतिशत मामलों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण मुआवजा मिलने में भारी देरी होती है। ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन बीमा, पंजीकरण प्रमाण पत्र और अन्य वैध कागजात नहीं होने से कई परिवार सरकारी सहायता और बीमा कंपनियों की राशि से वंचित रह जाते हैं।


