रजिस्ट्री से पैसे कमाने के मामले में महासमुंद जिला लक्ष्य से पहले ही काफी पीछे चल रहा है। वित्तीय वर्ष में तय लक्ष्य के मुताबिक जिले को पूरे साल में रजिस्ट्री से 32 करोड़ कमाने थे। 9 महीनों की बात करें, तो सरकार को 19.54 करोड़ राजस्व ही मिला है। रजिस्ट्री की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद 20 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच महज 1.63 करोड़ ही बतौर रजिस्ट्री शुल्क मिले हैं। 8 महीनों में एवरेज 2.66 करोड़ रुपए महीने की तुलना में यह कलेक्शन एक करोड़ रुपए कम है। रजिस्ट्री विभाग को अब इसकी तुलना में तीन महीने तक लगातार हर माह ढाई गुना मतलब करीब 4.15 करोड़ रुपए शुल्क से कमाना होगा, तब जाकर महासमुंद जिला अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है। जिले में 20 नवंबर से नई कलेक्टर गाइडलाइन लागू होने के बाद जमीन की खरीद-बिक्री के बाजार में सन्नाटा पसरा गया है। शासन ने 7 दिसंबर को गाइडलाइन दरों में संशोधन कर आम जनता को राहत देने की कोशिश तो की, लेकिन बाजार पर इसका कोई सकारात्मक असर फिलहाल नहीं दिख रहा है। शासन की नई गाइडलाइन ने रियल एस्टेट बाजार के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। इस साल महासमुंद रजिस्ट्री कार्यालय को 32 करोड़ राजस्व का लक्ष्य मिला है। अब तक केवल 19 करोड़ 54 लाख रुपए ही एकत्र हो पाई है। नई गाइडलाइन के पहले प्रतिदिन 20 से 25 रजिस्ट्री होती थी। अभी 7 से 8 ही हो पा रहे हैं। नई दरों के कारण जमीन की कीमतों में जो उछाल आया है, उसने आम आदमी के अपने घर के सपने को अधर में लटका दिया है। दरों में वृद्धि होने से बड़ी संख्या में ऐसे खरीदार जिन्होंने महीनों पहले जमीन का सौदा तय किया था, अब रजिस्ट्री कराने से कतरा रहे हैं। महासमुंद रजिस्ट्री कार्यालय में पहले प्रतिदिन औसतन 20 से 25 रजिस्ट्रियां होती थीं। भूमि मूल्य निर्धारण नीति में हुए बदलाव के बाद से ये अब घटकर केवल 7 से 8 हर रह गई हैं। साल 2024 32 करोड़ के टारगेट में 29.12 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व मिला था। वहीं इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अब तक केवल 19.54 करोड़ ही जमा हो पाए हैं। आने वाले समय में लौट सकती है तेजी : महासमुंद उप पंजीयक उत्तम टंडन ने कहा, संशोधन लंबे समय से बाजार में पारदर्शिता लाएंगे और आने वाले समय में खरीद-बिक्री में फिर से तेजी लौटेगी। वर्तमान में किसान धान बिक्री में व्यस्त है। जनवरी से ही पता लग पाएगा।


