फिरोजपुर रोड स्थित ओरिसन सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सोमवार को एक बुजुर्ग महिला का शव बदलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को किसी दूसरी महिला का शव सौंप दिया, जबकि उनकी रिश्तेदार महिला का शव ही गायब हो गया। घटना का खुलासा उस समय हुआ, जब परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेने पहुंचे और चादर हटाकर चेहरा देखा। जसवंत ने बताया कि उनकी प|ी के बीमारी की वजह से काफी कमजोर हो गई थी। और उनके चेहरे पर एक बड़ा तिल भी था। लेकिन जिस महिला का शव उन्हें दिखाया गया है। उनका चेहरा बिलकुल अलग है। साथ ही उनका वजन और कद भी काफी ज्यादा है। गुस्साए परिजन अस्पताल में ही धरने पर बैठ गए और शव सौंपने की मांग करने लगे। वहीं मामले में हैरानीजनक खुलासा तब हुआ जब पता चला कि मोगा निवासी महिला का शव शहर की जानीमानी शख्सियत मंजू दीवान के साथ बदल गया है, थाना सराभा नगर की पुलिस ने दीवान परिवार से संपर्क किया। 9 दिन चला इलाज, 19 दिसंबर को हुई मौत पीड़ित जसवंत सिंह निवासी गांव कहाड़ेवाल, मोगा ने बताया कि उनकी प|ी जसबीर कौर (72) लीवर की बीमारी से पीड़ित थीं। यहां 19 दिसंबर को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके दोनों बेटे जरनैल सिंह और बलवीर सिंह कनाडा में रहते हैं। इसलिए उन्होंने शव अस्पताल में ही रखने का फैसला किया। सोमवार सुबह दोनों बेटे के लौटने पर वह सुबह करीब 6 बजे अस्पताल में शव लेने पहुंचे। करीब 7 बजे जब वे मोर्चरी पहुंचे और चादर हटाई, तो पता चला यह शव किसी दूसरी महिला का है। धरने पर परिवार, कहा- अस्पताल पर शव चोरी का केस हो… वहीं जब भास्कर ने मंजू दीवान के बेटे सौरव दीवान से बात की, तो उन्होंने शव के बदलने की पुष्टि की, लेकिन इस बारे में कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। अस्पताल के एमडी नरेश घई ने सुबह कहा, उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं है। जब शाम को दोबारा संपर्क करने पर उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया बोले- जो जानकारी देनी थी, वह पुलिस को दे दी हैं। अब जांच की जा रही कि ये लापरवाही कैसे हुई। इसलिए ड्यूटी स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। साथ ही जसवीर कौर की मेडिकल रिपोर्ट भी चेक की जा रही है। जसवंत सिंह ने अस्पताल प्रबंधन पर उनकी प|ी के अंग निकालकर बेच दिए जाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसलिए उन्होंने पुलिस को उनकी प|ी का शव क्लब की महिलाओं ने पहले ही कहा था-शव मंजू दीवान का नहीं शहर के प्रतिष्ठित गीतांजलि लेडीज क्लब से जुड़ी रहीं मंजू दीवान के निधन के बाद अब एक गंभीर और बेचैन करने वाला सवाल खड़ा हो गया है। मंजू दीवान क्लब की प्रेसिडेंट रह चुकी थीं। उनकी तीन कुकिंग की किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। वह बीमार चल रही थीं और उनका इलाज भी जारी था। शनिवार को क्लब का कार्यक्रम के दौरान जब उनके निधन की खबर मिली, क्लब की 4-5 महिलाएं सीधे श्मशान घाट पहुंचीं। वहीं से कहानी ने अलग ही मोड़ ले लिया। महिलाओं का कहना है कि जब उन्होंने शव के अंतिम दर्शन किए तो डेड बॉडी मंजू दीवान जैसी बिल्कुल नहीं लग रही थी। चेहरा, कद-काठी और पूरी बनावट अलग थी। एक महिला ने तो साफ शब्दों में पूछ भी लिया कि क्या यह मंजू दीवान ही हैं? लेकिन उनके पति के हां कहने पर भी मन में असमंजस बना रहा। सोमवार को जब यह चर्चा शहर में फैली तो दबे स्वर मुखर हो उठे। महिलाओं का कहना है कि जब वे खुद भ्रम में थीं तो परिवार को कैसे कोई संदेह नहीं हुआ। वहां मौजूद अन्य लोगों ने भी यही सवाल उठाया था। महिलाओं का कहना है कि कई बार दुख और तनाव में परिवार वाले बिना पूरी तसल्ली के अस्पताल से दी गई बॉडी को स्वीकार कर लेते हैं। सवाल है कि इतनी गंभीर चूक आखिर हुई कैसे?” चोरी होने की शिकायत दी है। साथ ही अस्पताल और उस परिवार पर कार्रवाई की मांग की है। जो कि शव को लेकर गए हैं। जसवंत ने हैरत जताई कि अगर शव बदले भी है तो क्या दूसरी महिला के परिजनों ने शव को देखा नहीं या फिर किसी दूसरी वजह से अस्पताल से कोई सवाल नहीं किए। यह जांच का विषय है।


