इसरो से मिली ग्रांट, पीएयू के वैज्ञानिक ग्राउंड वॉटर सततता व क्लाइमेट रेजिलिएंस पर करेंगे शोध

लुधियाना। पीएयू के वैज्ञानिकों ने शोध के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ‘रिस्पॉन्ड प्रोग्राम’ के तहत विश्वविद्यालय को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजना के लिए वित्तीय मंजूरी मिली है। इस शोध का शीर्षक ‘ग्राउंड वॉटर रेज़िम इम्पैक्ट एंड क्लाइमेट चेंज टुवर्ड्स सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स’ है, जो जलवायु परिवर्तन के दौर में जल सततता और भविष्य की चुनौतियों पर केंद्रित है। प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. समनप्रीत कौर के नेतृत्व वाली इस टीम में डॉ. प्रभज्योत कौर सिद्धू, डॉ. सुरभि गुप्ता और राजर्षि साहा शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट पीएयू की उस भूमिका को और मजबूत करेगा, जिसमें राष्ट्रीय जल संकट के समाधान के लिए स्पेस-बेस्ड और जियोस्पेशियल तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। डॉ. समनप्रीत के अनुसार, भारत में कृषि और जल सुरक्षा के लिए जल स्रोतों की स्थिरता एक गंभीर चिंता का विषय है और यह अध्ययन विज्ञान-आधारित समाधान विकसित करने में मदद करेगा।इस शोध में उन्नत अर्थ ऑब्जरवेशन तकनीक, बिग डेटा एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग किया जाएगा। इससे एक ऐसा प्रिडिक्टिव मॉडल तैयार होगा जो भविष्य में भूजल की स्थिति और संवेदनशीलता वाले हॉटस्पॉट्स की सटीक पहचान कर सकेगा। वैज्ञानिक उपलब्धियों के अलावा यह पहल छात्रों और युवा वैज्ञानिकों के लिए जियोस्पेशियल और क्लाइमेट एप्लीकेशंस के क्षेत्र में उन्नत प्रशिक्षण के अवसर भी प्रदान करेगी। पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि इसरो जैसी प्रमुख संस्था के साथ यह रणनीतिक सहयोग विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट पीएयू को एक अग्रणी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के रूप में राष्ट्रीय मिशनों में योगदान देने के लिए नई पहचान दिलाएगा।

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