लाटरी कारोबारी से रिश्वत लेने के मामले में 5 साल बाद भी 17 पुलिसकर्मी की पहचान नहीं

भास्कर न्यूज |लुधियाना लाटरी कारोबारी सुभाष केट्टी से रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पांच साल बीतने के बावजूद पुलिस उन 17 कर्मचारियों की पहचान तक नहीं कर पाई है, जो कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए वीडियो में कैद हुए थे। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए हैं। कारोबारी ने कोर्ट के सामने कुल 28 वीडियो क्लिप पेश की थी। जिनमें अलग-अलग पुलिसकर्मी रिश्वत लेते नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद पुलिस अब तक सिर्फ 11 कर्मचारियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर पाई, जबकि 17 पुलिसकर्मी आज भी अज्ञात बने हैं। एडिशनल जज अमरिंदर सिंह शेरगिल ने पुलिस को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जो पुलिस आम लोगों और अज्ञात अपराधियों की पहचान करने का दावा करती है, वह अपने ही कर्मचारियों को पहचानने में खुद को असहाय नहीं बता सकती। इसलिए 17 पुलिसकर्मियों को जल्दी पेश किया जाए। वहीं सुनवाई के दौरान डीसीपी हरपाल सिंह और एडीसीपी-1 समीर वर्मा कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों की पहचान के लिए साइबर जांच और तकनीकी संसाधनों की मदद लेने की बात कहते हुए अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को तय की गई है। साथ ही कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को अलग से पत्र भेजकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि इस मामले में ठोस और प्रभावी कार्रवाई हो। यह मामला 2019-2020 का है, जब लॉटरी व्यापारी सुभाष केट्टी ने आरोप लगाया था कि कई पुलिसकर्मी लॉटरी विक्रेताओं से नियमित रूप से रिश्वत वसूल रहे हैं। केट्टी ने उस समय के पुलिस कमिश्नर को वीडियो सबूत सौंपे थे, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मार्च 2020 में मामला दर्ज किया गया। केट्टी की शिकायत पर एएसआई प्यारा लाल, एएसआई लखविंदर सिंह, एएसआई गुरचरण सिंह, एएसआई हरजिंदर सिंह, एएसआई सरबजीत सिंह, एएसआई रूपिंदर सिंह, हेड कांस्टेबल मेजर सिंह, कुलदीप सिंह, कांस्टेबल कुलवंत सिंह, होमगार्ड बलवीर चंद और परमजीत सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(1) और 13(2) के तहत केस दर्ज किया गया था। 1 नवंबर को परमजीत सिंह की मौत के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई, जबकि एएसआई प्यारा सिंह को पुलिस ने क्लीन चिट दे दी।

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