भास्कर न्यूज | लुधियाना भौतिकता की चकाचौंध और सांसारिक मोह-माया के जाल से मुक्त होकर ही आत्मा का वास्तविक उत्थान संभव है। यह विचार उपाध्याय जितेंद्र मुनि महाराज ने सोमवार को सुंदर नगर जैन स्थानक में आयोजित धर्मसभा के दौरान व्यक्त किए। श्रद्धालुओं के विशाल समूह को संबोधित करते हुए महाराज ने जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का असली मकसद केवल भौतिक सुखों का संग्रह करना नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें अपने भीतर व्याप्त विकारों और पापों की प्रवृत्ति का त्याग करना होगा। मुनि महाराज ने समझाया कि धर्म, ध्यान, तपस्या और त्याग ही वे चार मुख्य स्तंभ हैं। जिन पर चलकर मनुष्य मोक्ष का द्वार खोल सकता है। उन्होंने वर्तमान जीवनशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज का मनुष्य बाहरी दुनिया को जीतने की होड़ में व्यस्त है। जबकि असली विजय अपने अंतर्मन के विकारों को परास्त करने में है। महाराज के अनुसार त्याग ही वह ऊर्जा है जो आत्मा को कर्मों के बोझ से मुक्त कर उसे हल्का और पवित्र बनाती है।


