रिकवर बच्चों की पहचान पर संकट, आधार पर नाम कुछ और तो किसी के पास दस्तावेज नहीं

भास्कर न्यूज़ | लुधियाना जिले में बाल भिख मंगाने के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम के दौरान एक गंभीर सच्चाई सामने आई है। प्रशासन द्वारा हाल ही में रिकवर किए गए बच्चों की पहचान और पारिवारिक दावों को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को जब परिजन अपने-अपने बच्चों को लेने जिला बाल संरक्षण समिति के दफ्तर पहुंचे, तो दस्तावेजों की जांच में कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं। जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) रश्मि के अनुसार हालिया अभियान के दौरान अलग-अलग इलाकों से कुल 31 बच्चों को रिकवर किया गया था। सोमवार को जब इन बच्चों के आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों की जांच की गई, तो केवल 10 बच्चों के दस्तावेज पूरी तरह मान्य पाए गए। शेष बच्चों के दस्तावेज अधूरे थे या फिर उनमें गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं। जांच के दौरान पांच ऐसे बच्चे भी सामने आए, जिनके आधार कार्ड पर दर्ज नाम कुछ और थे, जबकि बच्चों ने अपना नाम अलग बताया। इन मामलों को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने इन बच्चों की दोबारा रिकवरी और सत्यापन की प्रक्रिया मंगलवार को करने का निर्णय लिया है। बाकी बच्चों के परिजनों से भी सहायक दस्तावेज मांगे गए हैं। इससे पहले नवंबर में की गई एक जिला-स्तरीय रिकवरी ने बाल भिख मंगाने के पीछे एक और खतरनाक पहलू उजागर किया था। प्रशासन द्वारा पिछले चार महीनों में करीब 50 बच्चों को सड़कों से हटाया गया, जिनमें कई बच्चे सिर्फ खाने के लिए नहीं, बल्कि नशे के लिए पैसे मांगते पाए गए। जांच में सामने आया कि छह साल तक के बच्चे सॉल्यूशन, एडहेसिव और अन्य इनहेलेंट नशों के आदी हो चुके हैं। डीसीपीओ रश्मि ने तब बताया था कि कई बच्चे भिख इसलिए मांगते हैं ताकि नशे की लत पूरी कर सकें। ऐसे बच्चों को रिहैबिलिटेशन होम भेजकर काउंसलिंग और नशा मुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन का कहना है कि रेलवे स्टेशन, सिविल लाइंस, पवेलियन मॉल और भीड़भाड़ वाले बाजार इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि बाल भिख मंगाने और बच्चों के शोषण के किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा। जिला प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि अगर कहीं बच्चे भिख मांगते या शोषण का शिकार होते दिखें, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क करें। प्रशासन का दावा है कि लुधियाना को बाल भिख मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। डीसीपीओ रश्मि- डीसीपीओ रश्मि ने साफ किया कि अगर किसी बच्चे की पहचान और पारिवारिक दावे को लेकर संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं किए जाते हैं, तो प्रशासन के पास माता-पिता के दस्तावेजों की जांच और जरूरत पड़ने पर डीएनए टेस्ट कराने का भी विकल्प खुला है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अवैध रूप से भिख मंगाने और शोषण से बचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। यह कार्रवाई जिले में चल रहे प्रोजेक्ट जीवनजोत 2.0 और बाल भिख मंगाने के खिलाफ विशेष अभियानों का हिस्सा है। इससे पहले 21 दिसंबर को जिला प्रशासन ने संभावित भिख मंगाने वाले इलाकों जैसे धार्मिक स्थल, प्रमुख चौक और बाजार क्षेत्रों में चेकिंग कर 11 बच्चों को भिख मांगते हुए रेस्क्यू किया था। उन बच्चों की काउंसलिंग कर सुरक्षित देखभाल के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

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