राजन गोसाईं | अमृतसर सिविल अस्पताल अमृतसर पंजाब में एकमात्र ऐसा अस्पताल है जहां एसएमओ के पास डीडीओ पावर है मगर चलाने को स्टाफ नहीं। किसी भी जिला स्तरीय अस्पताल में पैसों के लेन-देन, बजट पास करने और अन्य तरह के वित्तीय काम करने के लिए अलग से स्टाफ होना चाहिए। सूत्रों की मानें तो यह सारा कामकाज सिविल सर्जन कार्यालय और सिविल अस्पताल में कांट्रेक्ट पर तैनात डाटा आपरेटरों के जरिए किया जा रहा है। क्लेरिकल काम भी कांट्रेक्ट पर रखे गए कंप्यूटर आपरेटरों से कराया जा रहा है। ^सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से एसएमओ को डीडीओ स्टाफ देने के लिए कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। स्टाफ मिलने पर कामकाज सुचारु होगा, लेकिन अंतिम फैसला सरकार और उच्चाधिकारियों को ही लेना है। – डॉ. राजिंदरपाल कौर , असिस्टेंट सिविल सर्जन स्टाफ की कमी को लेकर 2019 से अब तक लगातार 9 बार लैटर लिखा जा चुका है मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पत्रों में मांग की गई है कि सिविल अस्पताल अमृतसर में डीडीओ के लिए तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति या तैनाती कर मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित की जाएं। बता दें कि सिविल अस्पताल के डीडीओ पावर को इस्तेमाल करने के लिए एक सुरपिंडेंटेंड, 2 सीनियर सहायक, 4 क्लर्क और 2 स्टेनों के अलावा एक अकाउंटेंट की जरूरत है लेकिन सारा काम एक निजी कंपनी की ओर से कांट्रेक्ट पर भर्ती डाटा आपरेटरों के जरिए कराया जा रहा है। करीब डेढ़ दशक से सिविल अस्पताल का वित्तीय लेन-देन भी एक डाटा ऑपरेटर से ही कराया जा रहा है। 200 बैड वाले जलियांवाला बाग मेमोरियल सिविल अस्पताल को वैसे डीडीओ पावर और डीडीओ नंबर भी जारी किया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद अस्पताल स्वतंत्र रूप से अपना काम नहीं कर पा रहा है क्योंकि उक्त दोनों शक्तियां एसएमओ के पास नहीं हैं। डीडीओ (ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग अफसर) अस्पताल की आर्थिक व प्रशासनिक कार्यों का प्रबंधन करता है, जैसे पैसों का आवंटन, बजट तैयार करना, बिलों का प्रसंस्करण (वेतन, प्रतिपूर्ति), अनुपालन सुनिश्चित करना (पीएफएमएस, एनपीएस) और स्थानीय खरीद की देखरेख करना। मूल रूप से वह कर्मचारियों और लाभार्थियों के लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक कड़ी के रूप में कार्य करता है। मगर मौजूदा हालात की बात की जाए तो सिविल अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की सर्विस बुक सिविल सर्जन कार्यालय के विभिन्न क्लर्कों के जिम्मे है। जबकि सैलरी बनाने की जिम्मेदारी एसएमओ की है, लेकिन इन बिलों को बनाने का जिम्मा सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात एक महिला क्लर्क के हवाले है।


