प्रीति जोशी | भीलवाड़ा एमएलवी कॉलेज में अब पढ़ाई का चेहरा बदल गया है। जो कॉलेज कभी सिर्फ लड़कों के लिए जाना जाता था, वहां अब छात्राएं लगातार अपना संख्याबल बढ़ा रही हैं। पिछले पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि एमएलवी कॉलेज में पीजी ही नहीं बल्कि यूजी की क्लासरूम की तस्वीरें पूरी तरह बदल चुकी हैं। जहां कभी क्लास में गिनी-चुनी लड़कियां और लड़के ज्यादा हुआ करते थे, आज हालात उलट गए हैं। हर क्लास में 50 से 70 प्रतिशत लड़कियां ही नजर आने लगी हैं। छात्रों की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है। 2021 में एमए में 75% सीटों पर लड़कियां थीं, और पांच साल बाद 2025 में भी यही अनुपात कायम है, लगभग 72% लड़कियों ने इस सत्र में एडमिशन लिया है। हालांकि इस सत्र में एमए में पूरी सीटें अब तक नहीं भर पाई हैं। सत्र 2021-22 में एमए की सीटें जहां 467 थीं, वहीं इस सत्र में केवल 408 सीटों पर ही एडमिशन हो पाया है। इस सत्र में एमकॉम और एमएससी में भी स्थिति यही है, औसतन हर साल 65–75% छात्राएं मेरिट में आकर पीजी में एडमिशन ले रही हैं। कॉलेज के शिक्षकों के मुताबिक, बेटियों की पढ़ाई के प्रति रुझान और अभिभावकों का सहयोग लगातार बढ़ा है। यही वजह है कि अब पीजी की मेरिट लिस्ट में टॉप 50 में से ज्यादातर नाम लड़कियों के होते हैं। यह आंकड़ा केवल एक विषय का नहीं बल्कि एमए, एमकॉम और एमएससी तीनों विषयों में समान रूप से बढ़ा है। ^कॉलेज प्राचार्य डॉ. संतोष आनंद का कहना है कि यह बदलाव समाज में बढ़ती जागरूकता और बेटियों की शिक्षा के प्रति परिवारों के नजरिए में आए बदलाव का नतीजा है। पिछले कुछ वर्षों से पीजी में ही नहीं बल्कि यूजी में भी लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। यह एक अच्छा ट्रेंड है। एक समय ऐसा था कि यूजी में भी बड़ी मुश्किल से लड़कियां एडमिशन लेती थीं। शिक्षा के प्रति लड़कियां गंभीर रहती हैं, लड़के पढ़ते नहीं हैं, इसलिए पीछे रह जाते हैं। एमएलवी कॉलेज के लिए यह गौरव की बात है कि अब यहां की लड़कियां पढ़ाई में जिले ही नहीं, प्रदेश की टॉप मेरिट तक पहुंच रही हैं।


