जनजाति समाज में शराबबंदी, दहेज प्रथा और शादियों में फिजूलखर्ची जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए चल रही समाज सुधार की मुहिम के बीच धमकियां देना डीजे संचालकों को भारी पड़ गया। डीजे बंद करने के सामूहिक फैसले से नाराज होकर समाज सुधारकों को फोन पर जान से मारने की धमकी देने वाले चार डीजे संचालकों को कुशलगढ़ थाना पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। भील समाज सुधार समिति और भील समग्र विकास परिषद कुशलगढ़ की ओर से आदिवासी समाज के हित में कई अहम और कड़े निर्णय लिए गए हैं। इन फैसलों का उद्देश्य शादियों और नोतरों में अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना और समाज में अनुशासन व सादगी को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में आयोजनों में डीजे बजाने पर पाबंदी लगाने की पहल की गई थी। डीजे बंदी से प्रभावित हुआ कारोबार, दी जाने लगीं धमकियां डीजे पर रोक के फैसले से डीजे संचालकों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा था। इससे नाराज कुछ संचालकों ने समाज सुधार की पहल कर रहे पदाधिकारियों को मोबाइल फोन पर धमकियां देना शुरू कर दिया। धमकियों में जान से मारने जैसी गंभीर बातें कही गईं, जिससे समाज में तनाव का माहौल बन गया। संगठनों ने थाने में दर्ज कराई शिकायत धमकियों से परेशान होकर भील समग्र विकास परिषद के अध्यक्ष रूपजी बारिया और भील समाज सुधार समिति के अध्यक्ष वजहिंग मईड़ा ने कुशलगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि समाज को जागरूक करने और कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाने के दौरान उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने बनाई टीम, सोमवार को गिरफ्तारी मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआई प्रवीणसिंह सिसोदिया के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। परिवादियों के बयान, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में खेड़पुर राशन निवासी बावरा पुत्र कालू खडिया, पोटलिया निवासी राकेश पुत्र बादर खडिया, भरतगढ़ निवासी मुकेश पुत्र दलसिंग डामोर और कांचला निवासी पवन राणजी कटारा शामिल हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समाज सुधार की गतिविधियों में बाधा डालने और धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव की पहल को मजबूती मिल सके।


