जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के होस्टलों में हो रही खाद्य सामग्री में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। बांसवाड़ा में एक ही दिन में एक ही सामग्री की अलग-अलग रेट पर सप्लाई हो रही है। उदयपुर-डूंगरपुर में कमेटी की ओर से निर्धारित रेट से ज्यादा का भुगतान हो रहा है। भास्कर ने उदयपुर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में पड़ताल की तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। डूंगरपुर में घी की एमआरपी 548 है, लेकिन भुगतान 605 रुपए से किया गया। उदयपुर में जीरे की रेट 641.72 रुपए का अनुमोदन हुआ, लेकिन भुगतान 776 रुपए प्रति किलो से हुआ। बांसवाड़ा में 2 अगस्त को टीएडी बालिका आश्रम हॉस्टल मडकोला में जीरे का भुगतान 473 रुपए प्रति किलो के हिसाब से ताे आश्रम छात्रावास कुशलगढ़ का जीरे का भुगतान 751 रुपए के हिसाब से हुआ। यहां खाद्य सामग्री की जांच रिपोर्ट में सामने आ गया कि सप्लाई मापदंड के अनुसार नहीं की गई। इसके बावजूद फर्म मनवार फुडस से बिना टेंडर सप्लाई हो रही है। जांच में गड़बड़, सैंपल फेल तो भी उसी फर्म से सप्लाई टीएडी विभाग की जांच में साबित हो गया कि हॉस्टलों में घी सरस की जगह महान, चाय पत्ती वाघ बकरी की जगह टाटा अग्नि और मसाले उपकार की जगह रुचिका ब्रांड के पाए गए हैं। उपभोक्ता भंडार की जांच में आटा आशीर्वाद-शक्तिभोग की जगह सूरज गोल्ड मिला है। साथ ही सामग्री खरीद में भी अनियमितता मानी हैं। डूंगरपुर के उपभोक्ता भंडार के महाप्रबंधक को दोषी माना हैं। इसके अलावा बांसवाड़ा के टीएडी होस्टल में खाद्य सामग्री के सैंपल लिए गए उसमें रुचिका ब्रांड का मिर्ची पाउडर और हल्दी पाउडर, पिंक-परी ब्रांड की सूजी एवं खुली चीनी सब स्टेंडर्ड पाई गई। फिर भी वही सामग्री वापस सप्लाई भी हो रही है। महाप्रबंधक बोले- हमारे यहां बढ़िया माल सप्लाई हुआ
“बढ़िया माल सप्लाई हुआ है, हमने तो तथ्यात्मक रिपोर्ट विभाग को भेज दी है। अभी संजय हाडा के यहां से ही माल सप्लाई हो रही है।”
-योगेश सिसोदिया, महाप्रबंधक, उपभोक्ता, भंडार बांसवाड़ा


