रामानुजगंज में गुंजन साहित्य संघ ने वर्ष 2025 के अंतिम सत्र पर एक काव्य गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस साहित्यिक संध्या में गीत, ग़ज़ल, कविता और हास्य के विभिन्न रंग देखने को मिले, जिसमें देश-विदेश के मूर्धन्य कवियों, गीतकारों और साहित्यकारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ कृष्णा बाबू जी ने सरस्वती वंदना से किया। मंच संचालन डॉ. दीपा गुप्ता (रामानुजगंज) ने कुशलतापूर्वक किया, जिन्होंने अपनी सहज और हास्यपूर्ण शैली से पूरे वातावरण को जीवंत बनाए रखा। इस अवसर पर “गुंजन साहित्य सम्मान–2025” से चयनित साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। काव्य पाठ की शुरुआत गिरधर जी ने “ये वर्तुल सी देह की गंध” से की। रफ़त आशिया जी ने सादगी पर आधारित रचना प्रस्तुत की, वहीं तमन्ना जी ने “लड़की हूँ, सामान नहीं” कविता के माध्यम से समाज की विकृत सोच पर प्रहार किया। कवियों ने अपनी रचनाओं में जीवन, दर्द और अनुभव की झलक पेश की कन्हैया जी ने सीमा पर तैनात जवानों की पीड़ा को अपनी रचना में व्यक्त किया। राजेश तिवारी जी के गीत “बूढ़ा बाग़वान” में पिता का मर्मस्पर्शी दर्द झलका। कामेश्वर जी ने “हमारी कहानी शहर में ग़ाफ़िल हो गई” सुनाकर श्रोताओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। विनोद मिश्रा जी ने “कुछ छूट गया है” के माध्यम से अंतर्मन की व्यथा प्रस्तुत की। एडमिरल नूर ख़ुर्रम साहब की ग़ज़ल “कौन कहता है मुझे प्यार नहीं” ने गोष्ठी को नई ऊँचाइयाँ दीं। नॉर्वे से जुड़े सुरेश चंद्र जी ने कार्यक्रम की सराहना की, जबकि कनाडा से जुड़ी भारती शर्मा “फ़िरदौस” जी ने अपने प्रभावशाली मुक्तक से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अन्य प्रस्तुतियों में शिशुपाल गुप्ता, वीरेंद्र, अर्जुन, डॉ. गिल, राजेश कुमार, मो. शिरी, रुस्तम, वीरेंद्र सिंह और जूही की रचनाओं को भी खूब सराहना मिली। कार्यक्रम के अंत में, सभी के आग्रह पर संचालिका डॉ. दीपा गुप्ता ने हास्य कविता प्रस्तुत की, जिसमें पतियों पर केंद्रित व्यंग्य ने पूरे सभागार को ठहाकों से भर दिया। भारती शर्मा “फ़िरदौस” जी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।


