बालाघाट के बैहर स्थित सरकार द्वारा संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में शुद्ध पेयजल की गंभीर समस्या सामने आई है। विद्यालय में अध्ययनरत 500 से अधिक आदिवासी छात्रों को वर्षों से साफ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें पानी जनित चर्म रोग और अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति से अभिभावकों में गहरी चिंता व्याप्त है। पालक-शिक्षक संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर उठाई आवाज मंगलवार को पालक-शिक्षक संघ के सदस्यों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को विद्यालय की इस गंभीर समस्या से अवगत कराया। संघ ने छात्रों के लिए शीघ्र शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। तालाब का पानी पीने को मजबूर छात्र जानकारी के अनुसार, बैहर स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में लगभग 100 से 200 मीटर दूर स्थित एक तालाब से पानी लिफ्ट कर फिल्टर के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया जाता है। इसी पानी का उपयोग पीने के लिए भी किया जा रहा है। पानी की गुणवत्ता को लेकर अभिभावकों में भारी नाराजगी है। अभिभावकों की चिंता, बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा पालक रमाप्रसाद धुर्वे ने बताया कि आदिवासी बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण अभिभावक बेहद परेशान हैं। बच्चों के बीमार होने की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसी कारण प्रशासन से समस्या के समाधान की मांग की गई है।विद्यालय में पेयजल संकट दूर करने के लिए प्रशासन द्वारा दो बार बोरवेल खनन का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों ही प्रयास असफल रहे। इसके चलते विद्यालय में पानी की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। अधीक्षक ने दी स्थिति की जानकारी छात्रावास अधीक्षक जगदीश कुमार ने बताया कि फिलहाल तालाब के पानी को फिल्टर कर विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस समस्या और इससे होने वाली परेशानियों से जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। कुआं खोदने का दिया गया सुझाव अधीक्षक के अनुसार, सभी अधिकारी इस स्थिति से भली-भांति परिचित हैं और सहायक आयुक्त द्वारा पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए कुआं खोदने का सुझाव दिया गया है। कलेक्ट्रेट पहुंचे पालकों को प्रशासन की ओर से जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया है। अभिभावकों को उम्मीद है कि शीघ्र ही छात्रों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।


