राजधानी में कमजोर आंखों वाले ऑटो, मैजिक, बस और ट्रक चला रहे हैं। इसका पता रविवार को लालघाटी पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगाए गए मेडिकल शिविर में पता चला। कुल 254 लोगों की आंखों की जांच की गई। इनमें से हर तीसरे ड्राइवर की नजर खराब मिली। 15 को तत्काल ऑपरेशन की जरूरत बताई, जबकि 155 को चश्मे का नंबर दिया गया। 90 ड्राइवरों को मोबाइल स्क्रीन देखने में परेशानी होती है, तो 80 को 6 मीटर से ज्यादा दूरी को देखने के लिए आंखों पर जोर लगाना पड़ता है। जांच कराने वालों में सभी 45 साल से अधिक उम्र वाले रहे। कुछ आम लोगों ने भी जांच कराई। चेकअल में क्या निकला 15 ऑपरेशन (मोतिया बंद और पुतली में समस्या)
155 दूर और पास का देखने में परेशानी
125 आंखें कमजोर होने के साथ बीपी और शुगर
135 को मौके पर ही चश्मे और ड्रॉप दिए गए 6 मीटर दूर लिखे अक्षर साफ दिखने चाहिए नियमानुसार सड़क पर वाहन चलाते समय 6 मीटर दूर लिखे अक्षर साफ दिखने चाहिए। लेकिन 80 ड्राइवर ऐसे मिले, जिन्हें यह साफ नहीं दिखते। बातचीत में कई ने बताया कि काम चल रहा है, इसलिए जांच नहीं कराते हैं। 40 पार हैं तो आंखों का चेकअप जरूरी रविवार को ट्रैफिक पुलिस ने सेवा सदन की मदद से लालघाटी पर ड्राइवरों को फोकस कर चेकअप कैंप लगाया। सेवा सदन के मैनेजर कुशल धरमानी ने बताया कि 40 की उम्र के बाद आमतौर पर पास का दिखना कम होने लगता है। आंखों पर ज्यादा प्रेशर पड़ने के कारण रोशनी जल्दी कम होने लगती है। इस कारण लोगों को चश्मा लगाना चाहिए। इससे आंखों की लाइफ बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि 40 की उम्र पार कर ली है तो आंखों की जांच जरूरी है। 30 फीसदी से अधिक बढ़े हादसे
बसों और बड़े वाहनों से होने वाली दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। 29 नवंबर को बोर्ड ऑफिस चौराहे से कुछ दूरी पर एक तेज रफ्तार यात्री बस ने बाइक सवार दो युवकों को रौंद दिया था। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। हाल ही में पीपुल्स कॉलेज की बस को ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी थी, जिससे एक छात्र की मौत हो गई थी। 2021 के मुकाबले 2023 में शहर के अंदर हादसों की संख्या में 30% से अधिक का इजाफा हुआ है।


