बागी अकाली नेताओं ने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से मुलाकात का समय मांगा है। बागी गुट ने एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल पर आरोप लगाया है कि पार्टी पुनर्गठन के लिए पैरलल पैनल बनाकर उन्होंने अकाल तख्त की धार्मिक सत्ता को कमजोर किया है। ये आरोप जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी ने अभी तक 2 दिसंबर को पांच सिख पुजारियों द्वारा दिए गए आदेश को पूरी तरह से लागू नहीं किया है। उस आदेश में अकाल तख्त द्वारा गठित सात सदस्यीय पैनल के तहत पार्टी के पुनर्गठन की बात कही गई थी। गुरप्रताप सिंह वडाला ने आरोप लगाया है कि शिरोमणि अकाली दल ने अब तक यह दावा किया है कि पार्टी को चुनाव आयोग के साथ एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी के रूप में पंजीकृत किया गया है, और यह किसी धार्मिक संस्था से दिशा-निर्देश नहीं ले गुसकती। श्री अकाल तख्त साहिब को कमजोर करने की साजिश गठित समिति के सदस्य गुरप्रताप सिंह वडाला ने आरोप लगाया है- यह बेहद निराशाजनक है कि एसएडी के मौजूदा नेतृत्व ने सिख पंथ के साथ विश्वासघात किया है और अकाल तख्त की सर्वोच्चता को कमजोर किया है। एक पैरलल समिति का गठन पार्टी की सदस्यता अभियान को चलाने के लिए किया गया था, जबकि जत्थेदार पहले ही यह घोषणा कर चुके थे कि अकाल तख्त द्वारा गठित पैनल मान्य रहेगा। हम जत्थेदार से मिलने और पैनल की स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांग रहे हैं। अकाली दल कोर कमेटी पर आरोप
वडाला ने दावा किया कि एसएडी कोर कमेटी तर्कहीन संवैधानिक और कानूनी बहाने पेश करके गुमराह कर रहा है। एक अन्य बागी अकाली नेता प्रीम सिंह चंदूमाजरा ने सोशल मीडिया पर एसएडी की आलोचना की। पार्टी ने अकाल तख्त के उस दृष्टिकोण को विफल कर दिया, जिसमें अकाली दल के पुनरुत्थान की बात की गई थी और इसके आदेश का अपमान किया। डीएसजीपीसी भी उतरी विरोध में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) ने भी एसएडी के खिलाफ अपने रोष को व्यक्त किया है। डीएसजीएमसी के धर्म प्रचार समिति व पंजाब के चेयरमैन मंजीत सिंह भोमा ने कहा कि एसएडी नेतृत्व ने अकाल तख्त के अधिकार को चुनौती दी है और समान विचारधारा वाले लोगों का एक पैनल बनाया है, जिसे सिख समुदाय कभी स्वीकार नहीं करेगा।


