यूपी में जमीन नामांतरण से जुड़े सभी प्रकार के मामले अब ऑनलाइन होंगे। इसके लिए लोगों को सरकारी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। राजस्व परिषद के डायरेक्टर अनिल कुमार ने यह बात दैनिक भास्कर से बातचीत में कही है। उन्होंने कहा कि अविवादित नामांतरण से जुड़े सभी 34 तरह के प्रकरण अब ऑनलाइन होंगे। यह किसी भी तरह से वेटिंग में नहीं रखे जाएंगे इससे जुड़ा हुए निर्देश एक सप्ताह में जारी किया जाएगा। वहीं, यूपी में खतौनी का भी अब डिजिटलीकरण किया जा रहा है। जमीन से जुड़े मामलों के तीन मुख्य आयाम होते हैं।इसमें खतौनी, जमीन का प्रकार और सजरा होता है। मुख्यमंत्री का विजन है कि जन सामान्य की समस्या खत्म हो। इसके लिए खतौनी में कोई गलती नहीं होने के लिए काम किया जा रहा है। नामांतरण में वारिस दर्ज करने में अभी 90 दिन का समय लगता है। इसे 90 दिन से अधिक पेंडिंग नहीं होना चाहिए। नाम चढ़ने की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
स्टांप रजिस्ट्रेशन से रिक्वेस्ट किया है कि आप लोगों इसकी जानकारी वेबसाइट से ही उठाएं। 60 प्रतिशत जमीन पर तहसील में सिर्फ इसलिए समय लेना होता है कि मुझे समय दिया जाए आपत्ति लगाने के लिए, लेकिन अब क्लियर कट डायरेक्शन लागू किया जाएगा। जिससे जनता को सहूलियत मिले। उद्यमियों ने उठाई समस्या तो बोले नामांतरण पर जारी करेंगे निर्देश
उद्यमियों की तरफ से कहा गया कि जमीन लेने पर धारा 80 की मंजूरी लेने में असुविधा होते हैं। इससे शोषण होता है। जमीन लेने के बाद चेक रोड अंदर आने पर उसकी जगह जमीन दिया जाता था, लेकिन अब ये कमिश्नर स्तर की मंजूरी के बाद होता है। इसे अब जिलाधिकारी स्तर पर करने की मांग की गई है। इस पर राजस्व परिषद के निदेशक ने कहा कि पहले यह व्यवस्था शासन के पास थी। अब कमिश्नर स्तर के पास में थी। SDM को चेक रोड को शिफ्ट करने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही जमीन पर डायरेक्टर बदलने के बाद कंपनी की जमीन को दोबारा नामांतरण कराने में समस्या होती है। इस दौरान तहसील स्तर के लोग पहले डायरेक्टर के नाम पर ही सिर्फ बात करते हैं न कि कंपनी के। इसपर राजस्व परिषद के निदेशक ने कहा कि नामांतरण के इस विषय पर जरूरी निर्देश एक सप्ताह में जारी होंगे ताकि, लोगों को सुविधा मिले। उप मुख्यमंत्री से बोले उद्यमी, UPPCB के अधिकारी करते हैं शोषण
लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष मधु सूदन दादू ने उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से कहा कि यहां पर सभी जिलों से उद्यमी आए हुए हैं। उन्होंने कहा कि हम उद्योग चलाते हैं। इसमें भी समस्या रहती है। उन्होंने कहा कि पॉलिसी बनने के बाद जो जियो आता है। उसको समझना कठिन होता है। अधिकारी या तो उसे समझ नहीं पाते हैं या समझना नहीं चाहते हैं। हमने पिछले 3 साल में 150 सुझाव दिए हैं। हम नियमों का पालन करने वाले उद्यमी हैं। नगर निगमों में प्रॉपर्टी टैक्स आवासीय के आधार पर करने की मांग, नेट मीटरिंग की पॉलिसी में बदलाव की मांग की है। MSME के लिए मिलने वाली पॉलिसी मिल नहीं पाती, फायर, पॉल्यूशन की NOC में सरलीकरण की मांग उठाई गई। समाधान योजना लागू करने की मांग
पिछले नियमों के उल्लंघन पर वन टाइम सेटलमेंट करने की मांग, ई टेंडर में शर्तों का सरलीकरण, एक जिला एक उत्पाद में कई उत्पाद शामिल करने की मांग। ई टेंडरिंग को समाप्त कर लॉटरी सिस्टम छोटे प्लॉट में करने की मांग हुई है। प्रदूषण उल्लंघन पर समाधान योजना लागू करने की मांग की है। UPPCB उद्यमियों का उत्पीड़न कर रही है। इसमें कई तरह से परेशान किया जाता है। SGST भुगतान में समस्या हो रही है। इसमें सुधार की मांग। UPSIDA के एरिया में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने चाहिए। भूमि संबंधित विकास शुल्क अधिक होता है। इस दौरान लीज रेंट कम करने की मांग हुई है। लघु उद्योग भारती लखनऊ के चेयरमैन अरुण भाटिया ने बताया कि अधिकारियों ने दो महीने के अंदर समस्या का समाधान कराने का आश्वासन दिया है।


