मध्य प्रदेश क्राइम फाइल में बात राजधानी भोपाल के कोलार इलाके के एक ऐसे दोहरे हत्याकांड की, जिसने न केवल शहर में सनसनी फैला दी, बल्कि जांच करने वाली पुलिस टीम को भी हैरान कर दिया। कहानी की शुरुआत एक लाश से होती है, जिसे जानवरों ने क्षत-विक्षत कर दिया था। जब पुलिस इस लाश के कातिलों की तलाश में मृतक के घर पहुंची तो दीवारों पर लगे खून के छींटों ने कत्ल की पहली परत खोली, लेकिन उसी घर के एक कोने में दफन एक दूसरे कंकाल ने इस केस को एक ऐसी अबूझ पहेली बना दिया, जिसकी गुत्थी आज भी लोगों के जेहन में उलझी हुई है। क्या था यह पूरा मामला…दोनों हत्या क्या एक ही व्यक्ति ने की थी? घर में दफन दूसरा कंकाल किसका था? पढ़िए क्राइम फाइल्स पार्ट-1 तारीख: 28 मई 2021, समय: सुबह 6 बजे… राजधानी भोपाल का कोलार रोड इलाका। प्रदीप मीणा के लिए यह सुबह किसी आम सुबह की तरह ही थी। वह रोज की तरह करीब साढ़े पांच बजे मॉर्निंग वॉक के लिए निकले। कोलार की सड़कों पर सुबह की ताजी हवा में टहलते हुए जब वह अमरनाथ रोड पर गब्बर डेरी के पास एक खुले मैदान के करीब पहुंचे। उनकी नजर एक ऐसे दृश्य पर पड़ी, जिसने उनके कदमों को वहीं जमा दिया। उनकी हार्ट बीट तेज हो गई। आंखों के सामने जो मंजर था, उस पर यकीन कर पाना मुश्किल था। सड़क किनारे एक इंसान का शव पड़ा था, लेकिन उसकी हालत इतनी भयावह थी कि पहली नजर में उसे पहचानना नामुमकिन था। शव को कुत्ते और सूअर बेरहमी से नोच रहे थे। प्रदीप ने हिम्मत जुटाई और शोर मचाकर जानवरों को वहां से भगाया। उनकी आवाज सुनकर आसपास के कुछ और लोग भी इकट्ठा होने लगे। जब प्रदीप ने ध्यान से शव को देखा तो उनका दिल दहल गया। कपड़ों और शरीर के बचे-खुचे हिस्सों से उन्होंने शव की शिनाख्त कर ली। यह उन्हीं के मोहल्ले में रहने वाला मोहन मारण था। चमड़ी गायब, आंखें नष्ट, उंगलियां और अंगूठे कुतरे हुए
पुलिस के लिए पहली नजर में ही यह साफ हो गया था कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि नृशंस हत्या का मामला है। शव की हालत किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी थी। गाल, नाक और कान की चमड़ी गायब थी। एक आंख पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थी और गर्दन तक की चमड़ी उधड़ी हुई थी। सिर और पेट पर गंभीर चोटों के गहरे निशान थे। उंगलियां और अंगूठे कुतरे हुए थे। वीभत्स बात यह थी कि शव का प्राइवेट पार्ट गायब था। यह स्पष्ट था कि मौत के बाद शव को जानवरों ने नोचा है, लेकिन शरीर पर मौजूद कई घाव इस बात की गवाही दे रहे थे कि मोहन को मारने से पहले उसे बेरहमी से पीटा गया था। पुलिस ने तत्काल हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने सबसे पहले मृतक मोहन मारण की पृष्ठभूमि खंगालनी शुरू की। मोहन (40) की शादी नहीं हुई थी। वह दामखेड़ा ए-सेक्टर, कोलार रोड में अपने मंझले भाई के परिवार के साथ रहता था। इस घर में उसकी भाभी उर्मिला मीणा अपने नाबालिग बेटे राजू और बेटी रिया (दोनों बदले हुए नाम) के साथ रहती थी। इसी मकान के कुछ हिस्से में राजेश नाम का एक व्यक्ति अपनी पत्नी सोनू के साथ किराए से रहता था और आशा नाम की एक अन्य महिला भी एक कमरे में किराएदार थी। मोहन के तीसरे नंबर के भाई सुनील ने पुलिस को बताया कि मोहन सबसे छोटा था। अकसर दूसरे भाई के परिवार के साथ ही रहता था। घटना से एक दिन पहले शाम साढ़े चार बजे उसने मोहन को दामखेड़ा में ही देखा था। अगले दिन सुबह चाचा राजवीर ने उसे फोन पर यह भयानक खबर दी। अब पुलिस के सामने कई सवाल थे। मोहन की हत्या किसने की? हत्या के पीछे का मकसद क्या था? क्या यह कोई रंजिश थी। कोई प्रेम प्रसंग का मामला था या फिर किसी अपने ने ही इस साजिश को अंजाम दिया? शुरुआती जांच में यह एक ब्लाइंड मर्डर लग रहा था। मोहन शराबी था, अकसर मारपीट करता था
पाथाखेड़ी में रहने वाले पड़ोसियों ने बताया कि मोहन शराबी था और अकसर नशे में अपनी भाभी उर्मिला के घर आता था। आए दिन घर में झगड़ा करता, गालियां देता और कई बार मारपीट पर भी उतर आता था। पड़ोसियों ने यह भी बताया कि 27 मई की शाम को भी मोहन शराब पीकर आया था और उसने जमकर हंगामा किया था। किराएदार राजेश, उसकी पत्नी सोनू और दूसरी किराएदार आशा ने भी इसी तरह के बयान दिए। जब पुलिस ने भाभी उर्मिला से पूछताछ की तो उसने भी यही कहानी दोहराई। उसने बताया कि 27 मई की रात करीब 11 बजे मोहन नशे में गालियां दे रहा था। इस पर उसने मोहन को डांटकर घर से भगा दिया था। उसके बाद वह कहां गया और उसे किसने मारा, इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं थी। सभी के बयान एक जैसे थे। पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल रहा था, लेकिन उर्मिला के घर की तलाशी के दौरान पुलिस को एक ऐसा क्लू मिला, जो इस अंधे कत्ल का पहला और सबसे अहम सुराग साबित हुआ। जब पुलिस की टीम उर्मिला के घर की जांच कर रही थी तो एक अफसर की नजर दीवार पर लगे कुछ धुंधले धब्बों पर पड़ी। ये खून के धब्बे लग रहे थे, जिन्हें धोने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने तुरंत फॉरेंसिक टीम को बुलाया। सैंपल जांच के लिए भेजे गए और रिपोर्ट आने पर इस केस की दिशा ही बदल गई। दीवार पर मिला खून किसी और का नहीं, बल्कि मृतक मोहन का ही था। अब पुलिस का शक गहरा गया। यह साफ हो गया था कि मोहन के साथ मारपीट घर के अंदर ही हुई थी। पुलिस ने किराएदारों और पड़ोसियों से दोबारा कड़ाई से पूछताछ शुरू की। इस बार दबाव पड़ते ही गुनाह की परतें एक-एक कर उधड़ने लगीं। किराएदार आशा बाई, ममता और राजेश की पत्नी सोनू के बयानों के आधार पर पुलिस ने मोहन की भाभी उर्मिला, उसके बेटे राजू और किराएदार राजेश पर हत्या का शक जताते हुए केस दर्ज कर लिया। चबूतरे के नीचे से निकला कंकाल
कहानी में सबसे बड़ा और खौफनाक मोड़ आना अभी बाकी था। मोहन की हत्या की जांच के दौरान जब पुलिस घर के कोने-कोने की तलाशी ले रही थी तो उन्हें एक कमरे के पास बने एक अजीब से चबूतरे जैसे स्ट्रक्चर पर शक हुआ। यह घर के बाकी हिस्सों से अलग दिख रहा था। पुलिस ने जब वहां खुदाई कराई तो अंदर से जो निकला, उसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स के होश उड़ गए। जमीन के नीचे एक इंसान का कंकाल दफन था। पुलिस एक हत्या की गुत्थी सुलझा नहीं पाई थी कि अब उनके सामने एक और लाश थी। हैरानी की बात यह थी कि इस कंकाल के बारे में घर में रहने वाले किसी भी सदस्य को कोई जानकारी नहीं थी। न उर्मिला, न उसके बच्चों को और न ही किराएदारों को। जिस घर में वे सालों से रह रहे थे, उसी घर में उनके पैरों के नीचे एक लाश दफन थी। एक तरफ कंकाल की गुत्थी उलझ गई थी तो दूसरी तरफ पुलिस मोहन के हत्यारों तक पहुंच चुकी थी। खून के सबूत और गवाहों के बयानों के बाद उर्मिला, राजू और राजेश के पास जुर्म कबूल करने के अलावा कोई चारा नहीं था। कड़ी पूछताछ में उर्मिला टूट गई। उसने जो कहानी बताई, वह रिश्तों के कत्ल की एक भयावह दास्तां थी। उर्मिला ने बताया कि उसके देवर मोहन को शक था कि उसकी बेटी रिया का किराएदार राजेश के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा है। इसी बात को लेकर वह घर में क्लेश करता था। 27 मई की रात करीब 10 बजे वह नशे में धुत होकर आया और इसी बात पर गाली-गलौज करने लगा। उर्मिला ने उसे डांटकर भगा दिया। रात 11 बजे मोहन फिर वापस लौटा। इस बार वह और भी ज्यादा गुस्से में था। उसने दरवाजा खटखटाया, लेकिन जब किसी ने नहीं खोला तो वह दीवार फांदकर आंगन में घुस आया और सीधे कमरे तक पहुंच गया। वह लगातार गालियां दे रहा था। उर्मिला के सब्र का बांध टूट चुका था। उसने अपने बच्चों से कहा, “इस बार इसका काम तमाम कर ही देते हैं, मार ही डालते हैं।” इसके बाद जो हुआ, वह हैवानियत की पराकाष्ठा थी। उर्मिला के हाथ में डंडा था। बेटे राजू ने हथौड़ा उठा लिया और बेटी रिया ने भी लोहे का पाइप ले लिया। जैसे ही मोहन कमरे में घुसा। तीनों उस पर टूट पड़े। बचाव में मोहन ने उर्मिला के कंधे पर दांत से काट लिया तो बेटी ने भी उसके हाथ पर काटा। इसी बीच किराएदार राजेश वहां पहुंचा। रिया ने उससे चिल्लाकर कहा, “मोहन के हाथ पकड़ लो।” राजेश ने मोहन के दोनों हाथ पकड़ लिए। इसके बाद उर्मिला ने डंडे से मोहन के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे वह लहूलुहान हो गया। बेटे राजू ने हथौड़े से और बेटी ने पाइप से उसके शरीर पर कई जगह मारा। दोनों ने मिलकर मोहन की लाश को एक्टिवा पर बीच में रखा और गब्बर डेरी के पास नदी किनारे सुनसान मैदान में फेंक आए। वापस आकर उन्होंने कमरे और आंगन में फैले खून को पानी से धो दिया और सबूत मिटाने के लिए आंगन में गोबर लीप दिया। हत्या में इस्तेमाल डंडा, हथौड़ा और पाइप भी उन्होंने छिपा दिए। पुलिस के सामने अब कत्ल की कहानी पानी की तरह साफ हो चुकी थी। पुलिस ने उर्मिला, उसके बेटे राजू और किराएदार राजेश को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। मोहन की हत्या की गुत्थी तो सुलझ चुकी थी, लेकिन उसके घर से मिला कंकाल पुलिस के लिए अब भी एक अबूझ पहेली बना हुआ था। मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में पढ़िए इन सवालों के जवाब एक और गहरे राज की ओर इशारा कर रहे थे, जिसका खुलासा होना अभी बाकी था।


