भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर मंगलवार को शाजापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया गया। इस मौके पर प्राकृतिक खेती पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जिले के 140 से अधिक किसानों ने भाग लिया। केंद्रीय कृषि मंत्री का लाइव उद्बोधन हुआ कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के उद्बोधन का ऑनलाइन सीधा प्रसारण किया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चल रही आधुनिक कृषि योजनाओं की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीज किस्मों और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन उपायों से किसानों की पैदावार और आमदनी दोनों बढ़ाई जा सकती हैं। किसानों को दी एकीकृत खेती की सलाह केंद्रीय मंत्री ने छोटे जोत वाले किसानों को एकीकृत खेती प्रणाली अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान केवल अनाज या सब्जी उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को भी अपनाएं। साथ ही प्राकृतिक खेती, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के संतुलित उपयोग तथा दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशेषज्ञों ने दी खेती की नई तकनीकों की जानकारी कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. अंबावतिया ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (जी-राम-जी योजना), फसल विविधीकरण और औषधीय फसलों की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. एस.एस. धाकड़ ने रबी मौसम में उपयोगी कृषि यंत्रों, संरक्षित खेती और जल प्रबंधन पर अपने विचार रखे। डॉ. गायत्री वर्मा ने मशरूम उत्पादन और मोटे अनाज के महत्व को बताया। वहीं, डॉ. मुकेश सिंह ने एकीकृत कीट प्रबंधन और रबी प्याज उत्पादन पर तथा डॉ. डी.के. तिवारी ने प्राकृतिक खेती और गेहूं उत्पादन की उन्नत तकनीकों पर जानकारी दी। प्रगतिशील किसान की सफलता बनी प्रेरणा कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन से सफल हुए प्रगतिशील किसान हरिओम परमार की खेती को विशेष रूप से सराहा गया। उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर संरक्षित खेती अपनाई और आधुनिक व विदेशी फसलों की खेती कर पहचान बनाई है। वे वर्तमान में 5 एकड़ भूमि पर खेती कर रहे हैं। विदेशी और दुर्लभ फसलों की खेती कर रहे हरिओम परमार की नर्सरी में 186 देशों की 200 से अधिक प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने 2 एकड़ में वियतनाम सुपर अर्ली कटहल, 2 एकड़ में पपीता और 4.50 बीघा में एप्पल बेर की खेती की है। इसके अलावा वे अदरक, आलू, स्ट्रॉबेरी, नींबू के साथ-साथ वॉटर एप्पल, ब्लैकबेरी, मलेशिया इमली, थाई पेमिलो, कैलिफोर्निया बादाम और विभिन्न किस्मों के जामुन जैसी दुर्लभ फसलें भी उगा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्राकृतिक और वैज्ञानिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया और कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन की सराहना की।


