देश के 706 मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे करीब 1.09 लाख छात्रों को कैडेवर (इंसानों की मृत देह) की जरूरत होती है। चिकित्सा शिक्षा के लिए कैडेवर की भारी कमी है। दरअसल, कम संख्या में देहदान होने से नए डॉक्टरों को तैयार करना मुश्किल होता है। ऐसे में 4 वरिष्ठ डॉक्टरों ने मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए अपना पार्थिव शरीर दान कर दिया और दूसरों के लिए मिसाल बने। ये कैडेवर मेडिकल छात्रों के लिए उनके ‘प्रथम रोगी’ होते हैं। देश में रोज करीब 27,000 मौतें होती हैं, लेकिन इनमें से 0.001 प्रतिशत लोग भी पार्थिव शरीर का दान नहीं करते हैं। आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल 5 लाख लोग अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं। एक्सपर्ट… हर साल हर मेडिकल कॉलेज को 10-15 कैडेवर की जरूरत
“हर मेडिकल कॉलेज को प्रत्येक बैच के लिए 10-15 कैडेवर चाहिए होते हैं। लेकिन पर्याप्त कैडेवर मिलते नहीं हैं। ऐसे में छात्रों को तकनीकी मॉडल या वर्चुअल रियलिटी पर निर्भर रहना पड़ता है, जो मानव शरीर की पूरी समझ नहीं दे पाते हैं।” ऐसे डॉक्टर जो मरने के बाद उदाहरण बन गए


