लुधियाना नगर निगम का दायरा बढ़ाने की योजना फिलहाल टाल दी गई है। 26 दिसंबर को होने वाली नगर निगम हाउस की बैठक के एजेंडे से नगर निगम में 100 से अधिक गांवों को शामिल करने के प्रस्ताव को बाहर कर दिया है। नगर निगम के अफसर सर्वे पूरा नहीं कर पाए जिसकी वजह से इस प्रस्ताव को इस बार नहीं लाया जा सकेगा। नगर निगम हाउस को यह प्रस्ताव पास करके 31 दिसंबर तक राज्य सरकार को भेजना था। मेयर ने निगम हाउस की बैठक का जो एजेंडा तैयार करवाया था उसमें इस प्रस्ताव को रखा गया था। जिसकी पुष्टि सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर ने भी की थी। लेकिन मंगलवार को जब मेयर ने हाउस की बैठक से पहले ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई तो यह प्रस्ताव एजेंडे में नहीं था। नगर निगम की लेट लतीफी से लटका मामला लुधियाना शहर के आसपास बनी सैकडों कॉलोनियां व गांवों को नगर निगम में शामिल किया जाना था। जिससे नगर निगम का दायरा ढाई से तीन गुना बढ़ जाना था। सरकार ने मेयर व नगर निगम कमिश्नर से 31 दिसंबर तक यह प्रस्ताव पास करके भेजने को कहा था। नगर निगम अफसरों ने इस पर काम भी शुरू कर दिया था लेकिन उनकी लेट लतीफी के कारण इसे टाल दिया गया। एजेंडे में नहीं था प्रस्ताव तो विपक्षी हुए हैरान 26 दिसंबर को हाउस की बैठक बुलाने का मुख्य उद्देश्य निगम की लिमिट बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी देना था। लेकिन जब ऑल पार्टी मीटिंग में हाउस का एजेंडा रखा गया तो उसमें यह प्रस्ताव नहीं था। बैठक में भाजपा की पार्षद पूनम रतड़ा ने मेयर से पूछा कि यह प्रस्ताव क्यों नहीं लाया गया तो उन्होंने तैयारी पूरी न होने की बात कही। जिस पर भाजपा पार्षद ने कहा कि पहले ही स्पष्ट कर दो कि कहीं ऐसा न हो कि आप फिर टेबल एजेंडे में इसे पेश कर देंगे। जिस पर मेयर ने कहा कि ऐसा नहीं होगा। निगम हाउस में नेता प्रतिपक्ष व पूर्व सीनियर डिप्टी शाम सुंदर मल्होत्रा ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण एजेंडे को बिना पूर्व सूचना के टेबल एजेंडे के तौर पर कतई पेश न किया जाए। नहीं हो पाई तैयारी तो अधूरा प्रस्ताव कैसे पेश करते मेयर इंद्रजीत कौर ने कहा कि यह प्रस्ताव हाउस की मीटिंग में लाया जाना था लेकिन इसकी तैयारी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि अधूरे प्रस्ताव को कैसे मीटिंग में पेश करते। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव पास करके 31 दिसंबर तक सरकार को भेजा जाना था। अब इसे आगे की बैठक में लाने की कोशिश की जाएगी। खर्च का बोझ बढ़ने से रोक दिया प्रस्ताव नगर निगम सूत्रों के अनुसार 100 से ज्यादा गांवों को निगम में शामिल करने से निगम का दायरा ढाई गुना बढ़ना था। निगम को इससे 26 से 30 करोड़ रुपए के करीब प्रॉपर्टी टैक्स की आमदनी होनी थी लेकिन इतने बड़े एरिया को डेवलप करने के लिए नगर निगम को कई सौ करोड़ रुपए की आवश्यकता होनी थी। नगर निगम को सरकार से भी कोई ठोस सहयोग नहीं मिला तो उन्होंने सर्वे पूरा न होने का बहाना बनाकर इस प्रस्ताव को एजेंडे से बाहर कर दिया। बताया जा रहा है कि निगम की वित्तीय हालत ठीक नहीं है। जिसकी वजह से निगम यह जोखिम लेना नहीं चाहता है।


