झाबुआ में विद्युत पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों और पेंशन सुरक्षा को लेकर मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में प्रदर्शन किया। पेंशनरों ने नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन दिया। यह प्रदर्शन प्रदेश के पांच प्रमुख पेंशनर संगठनों द्वारा गठित ‘संयुक्त मोर्चा’ के आह्वान पर किया गया। पेंशन फंड में भारी कमी ज्ञापन में बताया गया कि विद्युत प्रदाय अधिनियम 1948 और राज्य के राज पत्रों (2003, 2005, 2012) के तहत पेंशनरों के लिए सुरक्षित फंड होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार पेंशन भुगतान के लिए 69,000 करोड़ रुपए की आवश्यकता है, लेकिन अब तक इसमें केवल 1,750 करोड़ रुपए ही जमा किए गए हैं। पेंशनरों ने कहा कि इस कमी के कारण भविष्य में पेंशन रुकने का खतरा है। महंगाई राहत और भुगतान में अंतर संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि विद्युत उपभोक्ताओं से पेंशन और महंगाई राहत के लिए राशि वसूली जा रही है, लेकिन वह पेंशनरों तक पूरी नहीं पहुंच रही। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2019 से दिसंबर 2025 तक मूल पेंशन का 6.84 गुना भुगतान लंबित है। पेंशनरों को केंद्र सरकार द्वारा घोषित दरों के मुकाबले केवल 2% से 5% महंगाई राहत मिल रही है। यह है मुख्य मांगें पेंशनरों ने राज्य सरकार से उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह भविष्य में पेंशन भुगतान की गारंटी देने की मांग की। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर और तिथि के अनुसार महंगाई राहत देने तथा पेंशन फंड का वास्तविक आकलन और उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने की अपील की। पेंशनरों ने कहा कि यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि पहले से स्थापित नियमों का पालन कराने का अनुरोध है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।


