कलेक्टर टीना डाबी बोलीं-‘बड़ा शेर बन रहा था’:नेताजी की दोस्ती ‘मोर’ पर पड़ी भारी; ‘साहब’ को स्याही से नहलाया

नमस्कार उदयपुर में कांग्रेस नेता नेता हिस्ट्रीशीटरों के साथ मिलकर मोर का शिकार कर रहे हैं। पकाकर खाने का इंतजाम करते पकड़े गए। बाड़मेर में समस्या समाधान शिविर में भाजपा कार्यकर्ता ने कह दिया कि यहां काम बिना सिफारिश नहीं होते। बाद में कलेक्टर टीना डाबी ने कार्यकर्ता से कहा-बड़े शेर बन रहे थे। राजसमंद में रोड का नाम बदलने से नाराज युवक ने आयुक्त और सभापति पर स्याही डाल दी। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. कलेक्टर टीना डाबी बोलीं-बड़ा शेर बन रहा था सरकारी आदेश था। इसलिए शामियाना तानकर कुछ कुर्सियां डाल दी गईं। एक बैनर लगा दिया गया। जिस पर लिखा था- शहरी समस्या समाधान शिविर बाड़मेर। वैसे तो यह शिविर आम जन की समस्याओं का समाधान करने के लिए था। लेकिन चूंकि यह अघोषित रूप से औपचारिकता पूरी करने के लिए आयोजित किया जा रहा था, इसलिए उच्च अधिकारी इसमें इंट्रेस्ट नहीं ले रहे थे। न आयुक्त का पता था और न एडीएम साहब मौके पर थे। जब समाधान करने वाला ही कोई नहीं तो समस्या की क्या औकात जो इस शिविर में फटके? लेकिन समस्या तब उत्पन्न हुई जब जिला प्रभारी सचिव साहब कैंप का औचक निरीक्षण करने पहुंच गए। एक युवक जो खुद को भाजपा कार्यकर्ता बता रहा था उसने आरोप लगाया कि बिना सिफारिश के काम नहीं होते। ऐसे में साहब भड़क गए। आनन-फानन में उच्च अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। मजमा लग गया। कलेक्टर महोदया भी आकर बैठ गईं। युवक का उत्साह बढ़ गया। वह प्रशासन की परतें उघाड़ने लगा। दावे करने लगा। कलेक्टर साहिबा बोलीं- ये सुनने नहीं सुनाने आए हैं। जिला प्रभारी सचिव आयुक्त-एडीएम पर कुढ़कर चले गए। इसके बाद कलेक्टर महोदया युवक के पास पहुंचीं। नाराज होकर बोलीं- बड़े शेर बन रहे थे? 2. नेता ने किया मोर का शिकार उदयपुर में एक कांग्रेस नेता अपने हिस्ट्रीशीटर दोस्त के साथ बैठकर मदिरा पान कर रहे थे। उन्होंने कहा- अब तो जंगल नहीं बचेगा। जंगल नहीं बचेगा जानवर नहीं बचेंगे। बाघ नहीं बचेगा। तेंदुआ नहीं बचेगा। मोर नहीं बचेगा। हिस्ट्रीशीटर चौंका- क्या भैया? मोर भी नहीं बचेगा? मोर बड़ा स्वादिष्ट प्राणी है। अगर यह नहीं बचा तो स्वाद खत्म हो जाएगा। इससे पहले मोर न बचे, क्यों न मोर का शिकार किया जाए। इसके बाद दोनों दोस्त मोर के शिकार के लिए निकल पड़े। 3. साहबों को स्याही से नहलाया सड़क का नाम पहले महाराणा राजसिंह के नाम पर था। लेकिन इसकी मरम्मत के बाद जब दोबारा शिलान्यास हुआ तब इसका नाम आचार्य महाश्रमण अहिंसा मार्ग कर दिया गया। हालांकि सड़क का नाम बदल देने से न तो ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को मन बदलने वाला है और न ही पैदल चलने वालों को अतिरिक्त सहूलियत मिलने वाली है। इसके बावजूद एक युवक का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह नहीं चाहता था कि सड़क का नाम बदले। उसने ज्ञापन लिखने में स्याही खर्च करने से बेहतर समझा कि एक ही झटके में स्याही का ऐसा प्रयोग किया जाए कि ज्ञापन जिम्मेदारों के चेहरे पर छप जाए। बस यह विचार आते ही वह स्याही की बोतल लेकर उस जगह पहुंच गया जहां आयुक्त और सभापति महोदय निरीक्षण कर रहे थे। उसने बिना देर किए बोतल का ढक्कन खोला और स्याही से नहला दिया। यह अलग बात है कि इस घटना के बाद लोगों ने पकड़कर उसे मुर्गा बन जाने का आदेश दिया। आदेश की अवहेलना हुई तो थप्पड़-मुक्के और लात से समझाया। एक अलग बात यह भी है कि युवक भाजपा जिला आईटी सेल का संयोजक निकला। 4. चलते-चलते आम जनता को कहीं भी चैन नहीं है। कोई ऐसा दरवाजा नहीं जिसकी दहलीज पर उसे राहत मिले। हवा में प्रदूषण है। जमीन पर खनन है। सड़कों पर एक्सीडेंट हैं। खेतों में एमडी ड्रग्स की फैक्ट्रियां हैं। जिन्हें चुनकर विधानसभा भेजा वे कमीशन तय कर रहे हैं। जनता कहां जाए। क्या करे? ऐसे में आखिरी सहारा बचता है हारे का सहारा-खाटू श्याम हमारा। लोग सही तादाद में सुविधाजनक तरीके से मंदिर तक पहुंच सकें, इसके लिए काफी खर्चा किया गया है। दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। कोई बच्चों को लेकर दुखी है। कोई बीमारी से परेशान है। किसी को नौकरी नहीं मिल रही। किसी की शादी नहीं हो रही। रींगस से ही भक्ति की हिलोरें उठने लगती हैं कि बाबा के सामने जाकर ये मांगेंगे, वो मांगेंगे। ऐसा कहेंगे, वैसा कहेंगे। लेकिन बाबा की दहलीज पर मौजूद गार्ड उस प्रगाढ़ आस्था को ऐसा धक्का मारते हैं कि मन्नत को वहीं जन्नत नसीब हो जाती है। सोशल मीडिया पर ऐसा ही वीडियो शेयर किया गया है। जिसमें कहा गया है-चैन से दर्शन तो कर लेने दो। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…

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