झारखंड प्रादेशिक गोशाला संघ की मंगलवार को प्रदेश स्तरीय बैठक की शुरुआत गो पूजन और आरती से हुई। गोशालाओं के संचालन, गोवंश के संरक्षण, संवर्धन, स्वास्थ्य, आहार, प्रबंधन और आत्मनिर्भरता विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। संचालन महासचिव अनिल मोदी ने किया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष आरके अग्रवाल ने झारखंड की गोशालाओं के समुचित विकास के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने गो सेवा आयोग द्वारा प्रदेश की पंजीकृत गोशालाओं को विकास मद में हर वर्ष 50 लाख रुपए की अनुदान राशि बढ़ाकर एक करोड़ करने का आग्रह किया। उन्होंने कुट्टी और चारा मद में 100 से बढ़कर 200 करने और झारखंड में लागू बिहार गोशाला एक्ट 1960 को शिथिल कर प्रदेश में झारखंड गोशाला एक्ट लागू करने का भी आग्रह किया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि गोशालाओं में पशु चिकित्सकों की अस्थायी सेवा के लिए नियुक्ति की जाए, जिससे गोवंश का समुचित इलाज हो सके। गोशालाओं में उत्पादित केंचुआ खाद की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। सर्वसम्मति से राजकुमार अग्रवाल को पुनः झारखंड प्रादेशिक गोशाला संघ का अध्यक्ष चुना गया। राज्य की 26 गोशालाओं के बीच चारा, विकास मद व अन्य सुविधाओं के लिए 2 करोड़ 87 लाख का वितरण किया गया। गो सेवा आयोग के अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि गो सेवा को परम धर्म मानते हुए राज्य की गोशालाओं की स्थिति बेहतर करने का प्रयास किया गया है। सभी जिलों से गोचर भूमि की जानकारी मांगी गई है। गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने व गाय को पशुपालन विभाग से हटाकर राज्यमाता का दर्जा देने का प्रस्ताव रखा गया। मौके पर गो सेवा विशेषज्ञ कर्मवीर सिंह, उपाध्यक्ष ताराचंद जैन राजकुमार शाह, रामाकांत गुप्ता, शत्रुघन लाल गुप्ता, प्रमोद सारस्वत, डॉ. शालनी, पुनीत पोद्दार, बसंत मित्तल, अजय मारू व अन्य मौजूद थे। झारखंड प्रादेशिक गोशाला संघ की बैठक में उपस्थित पदाधिकारी।


