भास्कर न्यूज | अमृतसर पवित्र वॉल्ड सिटी का दर्जा मिलने के बाद निगम ने तंबाकू और मीट की दुकानों-खोखों को बंद करने के निर्देश दुकानदारों को देने शुरू कर दिए हैं। निगम की टीम वॉल्ड सिटी में तंबाकू खोखों पर जाकर दुकानदारों को इन्हें तुरंत हटाने को कह रही है। न हटाने की स्थिति में खोखे तोड़ने की चेतावनी भी दी जा रही है। मीट के दुकानदारों तक निगम की टीमें नहीं पहुंची हैं। सबसे बड़ी समस्या मच्छी मंडी के कारोबारियों के लिए खड़ी हो गई है। इससे 70 साल पुरानी मंडी के बिखरने की नौबत आ गई है। कारोबारियों के अनुसार मंडी के लिए अलग जगह नहीं मिली तो दुकान अलग हो जाएंगी व मंडी बिखर जाएगी। समस्या को लेकर बुधवार को होलसेल मच्छी मंडी हाल बाजार का प्रतिनिधिमंडल डीसी दलविंदरजीत सिंह से मिल मांग पत्र सौंपेगा। कटड़ा कर्मसिंह में 7 साल से पान-सिगरेट का खोखा चला रहे रामू पाल ने बताया कि निगम के कुछ मुलाजिम उन्हें दोपहर में यह कह कर गए हैं कि तुरंत खोखा हटा ले, नहीं तो वह खोखे को तोड़ देंगे। रामू ने बताया कि उसने इलाके के कई लोगों को उधारी दे रही रखी है। निगम के लोग उसे उस उधारी को इकट्ठा करने का समय भी नहीं दे रहे। रामबाग चौक में वॉल्ड सिटी की बाउंड्रीवाल के साथ चिकन की दुकान चलाने वाले जसपाल सिंह ने बताया कि आदेशों को सुनने के बाद असमंजस में हैं। क्योंकि वह हैं तो शहर की बाउंड्रीवाल के बाहर मगर बाउंड्रीवाल के साथ ही होने के कारण उन्हें चिंता है कि कहीं उन्हें भी दुकानें शिफ्ट करने को न कह दिया जाए। वहीं पान-सिगरेट के खोखे वालों का प्रतिनिधिमंडल दुर्ग्याणा मंदिर कमेटी अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांता चावला से मिला और उनकी दुकानदारी बचाने की मांग की। हाल गेट मच्छी मंडी के अंदर मछली बेचने वाले मक्खन फिश शॉप के मालिक राजिंदर कुमार और पार्टनर मनोज कंबोज ने कहा कि सरकार के फैसले का वह स्वागत करते हैं, मगर साथ ही मांग करते हैं कि मच्छी मंडी के लिए प्रशासन एक डेडिकेटेड जमीन अलाट करे। प्रशासन को उस जमीन के वाजिब दाम भी वे देने को तैयार हैं। कंबोज ने कहा कि अभी तक नगर निगम या प्रशासन की ओर से उन्हें शिफ्ट या दुकानें बंद करने के लिए बारे में निर्देश नहीं आए हैं। मगर अखबारों से पता चला है कि निगम मीट की दुकानें बंद करवाने जा रहा है। वह प्रशासन को यह बताना चाहते हैं कि यह मंडी 70 साल से ज्यादा पुरानी है। वाल्ड सिटी में जो मीट और सिगरेट की दुकानें हैं, उन्हें बंद करवाना और मच्छी मंडी को बंद करवाना, दोनों अलग-अलग बाते हैं। क्योंकि मंडी में होलसेल का कारोबार होता है। यहां 20 से ज्यादा कारोबारी यहीं कारोबार करते हैं। तीन जिलों समेत कई कस्बों (अजनाला, बटाला, झब्बाल, हरिके पत्तन, भिखीविंड, गुरदासपुर, तरनतारन, गोइंदवाल साहिब) से परचून विक्रेता और रेस्टोरेंट मालिक मछली खरीदने आते हैं। जम्मू–कश्मीर तक सप्लाई होती है। विदेश से यहां मछली आती है। इतने बड़े स्तर पर कारोबार यहां पर दशकों की मेहनत से स्थापित हुआ है। मंडी के कारण अमृतसर में रोजाना लाखों रुपए का रेवेन्यू जनरेट होता है। शहर के मुख्य बिजनेस सेंटर्स में से यह एक है। प्रशासन से सिर्फ यही मांग है कि मंडी के लिए जगह दी जाए। बेरी गेट के अंदर मीट बेचने वाले साजिद अहमद ने कहा कि निगम की ओर से उन्हें दुकानें हटाने का कोई निर्देश नहीं मिला है। अखबारों से पता चला कि मीट की दुकान बंद करवाई जानी हैं। साजिद ने कहा कि वह तो सिर्फ मीट बेचने का काम करता है। दुकान 50 साल से ज्यादा पुरानी है। इससे पहले उसे पिता जी दुकान को चलाते थे। अब अचानक कहां चला जाएं।


