स्कूल की जमीन पर मालिकाना हक के फैसले से 400 विद्यार्थियों पर आया संकट

भास्कर न्यूज | ब्यावर गोविंदपुरा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की जमीन को लेकर उपजे विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। विद्यालय की भूमि पर मालिकाना हक को लेकर चल रहे अदालती प्रकरण में आए हालिया फैसले से ग्रामीणों में भारी रोष और चिंता है। मंगलवार को भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह रावत और पूर्व सरपंच गणपत सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर विद्यालय के अस्तित्व को बचाने की मांग की। ​​गोविंदपुरा में वर्ष 1984 में प्राथमिक विद्यालय की शुरुआत हुई थी, जिसे समय के साथ क्रमोन्नत कर उच्च माध्यमिक स्तर तक कर दिया गया। सितंबर 1995 और बाद के रिकॉर्ड के अनुसार खसरा नंबर 295 में दो बीघा 10 बिस्वा जमीन स्कूल के नाम आवंटित की गई। 5 मई को तत्कालीन प्रशासन द्वारा खसरा नंबर 541/295 (रकबा 0.4047 हेक्टेयर) का पट्टा भी विद्यालय के नाम जारी किया गया था। जमीन के एक हिस्से (2400 वर्ग जमीन) पर रूपकला मिश्रा एवं सुमन मिश्रा ने अपना मालिकाना हक जताया है। यह मामला वर्ष 1995 से न्यायालय में विचाराधीन था। हाल ही में न्यायालय द्वारा रूपकला मिश्रा के पक्ष में कब्जा सुपुर्द करने की डिक्री जारी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्कूल की जमीन हाथ से निकलती है तो यहां पढ़ रहे 400 से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। कक्षा 12 तक संचालित इस स्कूल में बुनियादी सुविधाओं और खेल मैदान के लिए जमीन की आवश्यकता है। ऐसे में विद्यालय की जमीन से एक बड़ा हिस्सा अगर चला जाता है तो संकट की स्थिति खड़ी हो जाएगी। ​ज्ञापन देने वालों में भाजपा नेता विक्रांत सिंह रावत, नारायण सिंह, ईश्वर शरण तंवर, विजय सिंह, चेतन सिंह, गजेंद्र, चिराग मेघवाल, नेपाल सिंह, मदन सिंह, महेंद्र सिंह, भैरुलाल शर्मा, नरेंद्र और लखाराम सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।

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