दतिया जिले में चौकीदार की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी सचिन उर्फ सच्चू परिहार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि यह सुनियोजित और नृशंस हत्या है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। मामला बसई थाना क्षेत्र के मानिकपुर गांव का है। 23 अक्टूबर 2024 की रात श्रीराम कॉलेज परिसर में चौकीदार प्रहलाद लोधी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। मृतक के सिर, कनपटी, गर्दन और हाथों पर कई वार किए गए थे, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। मृतक के पिता हरिराम लोधी को फोन पर सूचना मिली थी कि उनका बेटा कॉलेज परिसर में खून से लथपथ पड़ा है। जब वे मौके पर पहुंचे तो प्रहलाद की मौत हो चुकी थी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जांच में आरोपी की भूमिका सामने आई पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की। जांच के दौरान परिस्थितिजन्य, वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस जांच में आरोपी सचिन उर्फ सच्चू परिहार की घटनास्थल पर मौजूदगी के पुख्ता प्रमाण मिले। डीएनए रिपोर्ट बनी सबसे मजबूत सबूत अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के जब्त कपड़ों पर मिले रक्त के नमूनों का डीएनए मृतक से मेल खाना निर्णायक साक्ष्य है। कोर्ट ने माना कि वैज्ञानिक साक्ष्य और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। कोर्ट की टिप्पणी- समाज में भय फैलाने वाला अपराध अदालत ने टिप्पणी की है कि आरोपी ने कुल्हाड़ी से बार-बार वार कर हत्या की, जिससे उसकी मंशा स्पष्ट होती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं, इसलिए आरोपी को कठोर सजा देना आवश्यक है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद होने का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका, जो उसके खिलाफ एक अहम कड़ी है। फैसले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायदृष्टांतों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि जब हत्या नृशंस तरीके से की गई हो और सबूतों की श्रृंखला पूर्ण हो, तो आजीवन कारावास ही उचित दंड है।


