रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह मंगलवार रात कड़ाके की ठंड में रियलिटी चेक करने सड़कों पर निकलीं। हालात देखकर वे अधिकारियों पर बिफर पड़ीं। शहर के रैन बसेरों में जहां पलंग खाली पड़े थे, वहीं गरीब और बेसहारा लोग सड़क किनारे ओटलों पर ठिठुरते हुए सो रहे थे। कलेक्टर ने मौके पर ही अधिकारियों से सवाल-जवाब किए और सड़क पर सो रहे लोगों को रैन बसेरों में शिफ्ट कराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रैन बसेरे बने ही इसलिए हैं ताकि कोई ठंड में परेशान न हो। अस्पताल से भगाने की बात सुन भड़कीं निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर्स के ओटलों पर भी लोग सोते मिले। कलेक्टर ने गाड़ी रुकवाकर उनसे पूछा कि वे यहां क्यों सो रहे हैं। इस पर एक शख्स ने बताया कि वे रतलाम के ही हैं और अस्पताल के अंदर सोए थे, लेकिन वहां किसी अधिकारी ने उन्हें बाहर निकाल दिया। यह सुनकर कलेक्टर नाराज हो गईं। उन्होंने तहसीलदार ऋषभ ठाकुर को तत्काल जांच के निर्देश दिए कि पता लगाएं किसने मना किया है और गरीब लोगों को बाहर क्यों निकाला गया। कमिश्नर को निर्देश- रात में राउंड लगाएं, वरना कार्रवाई होगी कलेक्टर ने महू रोड बस स्टैंड, हाथी खाना और सिविक सेंटर स्थित तीनों रैन बसेरों का निरीक्षण किया। वहां गद्दे, रजाई और गर्म पानी की व्यवस्था जांची। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना और तहसीलदार को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि ठंड में कोई भी खुले में न सोए। निगम के स्वास्थ्य अधिकारी रात में भ्रमण करें और बाहर सो रहे लोगों को रैन बसेरे में शिफ्ट कराएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लापरवाही मिली तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर अलाव जलाने के निर्देश भी दिए।


