ग्वालियर मे हाईकोर्ट की युगल पीठ ने फैमिली कोर्ट के एक आदेश को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब समझौते का आवेदन वापस ले लिया गया हो, तब किसी तलाक प्रकरण को बिना सुनवाई के बंद नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने पत्नी द्वारा दायर प्रथम अपील पर दिया। बता दें कि अपीलकर्ता महिला का विवाह 24 नवंबर 2012 को हुआ था। वह एक सरकारी शिक्षिका थी। आरोप है कि ससुराल पक्ष ने उस पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया। अगस्त 2020 में उसे ससुराल से निकाल दिया गया, जिसके बाद महिला ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत मुरैना के अंबाह कोर्ट में तलाक का आवेदन दायर किया। महिला ने समझौते का आवेदन वापस ले लिया मामले की सुनवाई के दौरान काउंसलिंग के आधार पर महिला ने अस्थायी रूप से समझौते पर सहमति दी और दो महीने पति के साथ रहने को राजी हुई। हालांकि, ससुराल में उसके साथ दुर्व्यवहार जारी रहा। इसके बाद उसने समझौते से इनकार करते हुए अपना आवेदन वापस ले लिया। फैमिली कोर्ट ने तलाक की याचिका समाप्त मान ली हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट ने समझौते का आवेदन खारिज होने के बावजूद यह मान लिया कि पक्षकारों में सुलह हो चुकी है। इसी आधार पर तलाक की याचिका भी समाप्त कर दी गई। जबकि कानूनी रूप से, समझौता अस्वीकार होने के बाद प्रकरण को साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय तक पहुंचाया जाना चाहिए था। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को उसी चरण से पुनः बहाल कर दिया, जहां से उसे बंद किया गया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 20 जनवरी 2026 को ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में दोनों पक्ष चाहें तो समझौते के लिए प्रयास कर सकते हैं।


