धार जिले में आज भी हजारों परिवार अंधेरे में जिंदगी गुजार रहे हैं। जिले के सुदूर अंचलों में करीब 3 हजार परिवार ऐसे हैं, जिनके घरों तक स्थायी बिजली आपूर्ति नहीं पहुंच पाई है। यह स्थिति तब है, जब जिले में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। पिछले कुछ सालों में सरकारी योजनाओं के जरिए अधिकांश गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है। हालांकि धार जिले की भौगोलिक परिस्थितियां अब भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं। आदिवासी परिवार मुख्य गांवों से दूर पहाड़ियों, जंगलों और खेतों के पास छोटी-छोटी बस्तियों में रहते हैं। इन इलाकों तक बिजली लाइन पहुंचाना तकनीकी और आर्थिक दोनों रूप से कठिन साबित हो रहा है। सर्वे में सामने आया कि 3000 परिवार अब भी अंधेरे में केंद्र सरकार की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत कराए गए सर्वे में यह स्थिति सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, धार जिले के सुदूर इलाकों में आज भी करीब 3 हजार परिवार बिना बिजली के जीवन यापन कर रहे हैं। इनमें से कई परिवार मुख्य बस्तियों से 1 से 2 किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी पर रहते हैं, जिससे बुनियादी ढांचा तैयार करना और मुश्किल हो जाता है। बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव इन हालात को देखते हुए विद्युत वितरण कंपनी और जनजातीय कार्य विभाग ने मिलकर एक नई योजना तैयार की है। योजना के तहत बिजली से वंचित आदिवासी परिवारों तक स्थायी विद्युत सुविधा पहुंचाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। फिलहाल इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। मंजूरी मिली तो बदलेगी सुदूर इलाकों की तस्वीर यदि केंद्र सरकार से प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, तो धार जिले के आदिवासी अंचलों में हजारों घरों तक बिजली पहुंचेगी। इससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों में सुधार होगा। प्रशासन को उम्मीद है कि बिजली मिलने से इन परिवारों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आएगा।


