भास्कर न्यूज | बालोद सामान्य व सिजेरियन प्रसव के मामले में पहले से ही रेड जोन में शामिल जिला अस्पताल में पदस्थ निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. ए साहू ने प्रबंधन को इस्तीफा सौंप दिया है। जिसकी पुष्टि सोमवार को सिविल सर्जन डॉ. आरके श्रीमाली ने की। प्रबंधन के अनुसार निश्चेतना विशेषज्ञ 3 फरवरी तक आएंगी। तब तक किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने का दावा किया जा रहा है लेकिन 4 फरवरी से उनके स्थान पर कौन आएगा, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में गंभीर केस को रेफर करने के अलावा प्रबंधन के पास कोई और विकल्प नहीं रहेगा। शासन व स्वास्थ्य विभाग की ओर से फरमान जारी हुआ है कि सरकारी या निजी दोनों में से एक जगह काम कर सकते हैं। जिसके चलते निश्चेतना विशेषज्ञ ने इस्तीफा दिया है। दरअसल संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ के आयुक्त सह संचालक ने सीएमएचओ, सिविल सर्जन को पत्र भेजकर निर्देश दिए है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के चिकित्सकों को निजी प्रैक्टिस करने की छूट रहेगी लेकिन निजी प्रैक्टिस नर्सिंग होम या प्राइवेट क्लीनिक में जाकर करने की अनुमति नहीं होगी। निश्चेतना विशेषज्ञ की नियुक्ति एनएचएम से हुई थी। सीधी बात डॉ. आरके श्रीमाली, सिविल सर्जन जिला अस्पताल ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जिला अस्पताल को इस श्रेणी में रखा गया जिला अस्पताल में अप्रैल 2024 से दिसंबर तक 9 माह में सिर्फ 511 प्रसव हुए है। इस लिहाज से हर माह औसत सिर्फ 57 प्रसव हो रहे हैं। जिसके चलते ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जिला अस्पताल को रेड श्रेणी में रखा गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ की ज्वाइनिंग के बाद पहले की तुलना में अक्टूबर से दिसंबर तक ज्यादा प्रसव हुए बावजूद ओवरऑल स्थिति कमजोर है। अक्टूबर में 89, नवंबर में 81, दिसंबर में 84 प्रसव हुए है। जबकि इसके पहले अप्रैल में 57, मई में 51, जून में 34, जुलाई में 43, अगस्त में 42, सितंबर में 30 प्रसव हुए थे। यहां कोई विशेषज्ञ नहीं होने का हवाला देकर रेफर कर रहे केस ग्रामीण क्षेत्र में संचालित उप स्वास्थ्य केंद्र, हेल्थ वैलनेस सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से गंभीर केस को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। लेकिन यहां आने के बाद विशेषज्ञ नहीं होने का हवाला देकर निजी या दूसरे जिले के सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। इस दौरान गर्भवती महिलाएं, परिजन भटकते रहते है। तीन माह पहले शासन स्तर से स्त्री रोग विशेषज्ञ की ज्वाइनिंग के बाद गर्भवतियों को राहत मिल रही थी, लेकिन निश्चेतना विशेषज्ञ के बिना स्त्री रोग विशेषज्ञ सिजेरियन प्रसव नहीं करवा पाएगी। निश्चेतना विशेषज्ञ ने इस्तीफा दे दिया, राहत दिलाने वैकल्पिक व्यवस्था क्या है? – निश्चेतना विशेषज्ञ ने इस्तीफा सौंपा है, इस संबंध में उच्च अफसरों को जानकारी दे चुके हैं। फिलहाल वह आ रही है, वैकल्पिक व्यवस्था जल्द बनाएंगे। निश्चेतना व स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के बावजूद केस क्यों रेफर हो रहे हैं? – परिस्थिति अनुसार केस रेफर करना पड़ता है। कई बार विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं रहते। निश्चेतना विशेषज्ञ की नियुक्ति कब तक हो जाएगी? – विशेषज्ञ की नियुक्ति करने विभाग के डायरेक्टर को पत्र भेज चुके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही नियुक्ति होगी और गर्भवतियों को राहत मिल सकेगी। शासन स्तर से देरी होती है, स्थानीय स्तर पर गर्भवतियों को राहत दिलाने क्या प्लान है? – निजी अस्पताल में भी निश्चेतना विशेषज्ञ नहीं है, विशेष मौके पर सीएमएचओ आते हैं, आगे भी ऐसा हो सकता है।


