सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी सरकारी स्कूलों की मानसिकता और कार्यशैली में बदलाव नहीं दिख रहा है। स्कूलों में लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए शौचालयों की स्थिति बद से बदतर है। कहीं शौचालय पूरी तरह से जर्जर व बंद हैं, तो कहीं पानी की कमी के कारण इनकी उपयोगिता तय नहीं हो पा रही है। अधिकांश विद्यालयों में शौचालयों का निर्माण तो करवा दिया गया है। पर पानी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं रहने के कारण इसका उपयोग नहीं के बराबर किया जाता है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के साथ- साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई जगह तो बच्चे खुले में भी शौच के लिए जाते हैं। पंचायत स्तरीय शिक्षा समिति पड़ गई है निष्क्रिय जिले भर के 344 पंचायतों मे वर्ष 2023 में पंचायत स्तरीय शिक्षा समिति का गठन कर स्थानीय पंचायत के स्कूलों की देखरेख की जिम्मेवारी सौंपी गई थी। पर सभी समितियां निष्क्रिय हो जाने से स्कूल की निगरानी नहीं की जा रही है। केस स्टडी: 01. राजकीय मध्य विद्यालय सुग्गासार में टूट गया शौचालय गिरिडीह सदर प्रखंड के अंतर्गत राजकीय मध्य विद्यालय सुग्गासार में बना शौचालय पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। शौचालय का गेट टूट जाने और पानी की व्यवस्था नहीं रहने के कारण शौचालय किसी काम का नहीं है। शौचालय ठीक नहीं रहने के कारण बच्चे शौच के लिए घर चले जाते हैं। प्रधानाध्यापक रविकांत चौधरी ने कहा कि मरम्मत के बिना शौचालय का उपयोग संभव नहीं है। परिसर में शौचालय ठीक नहीं रहने के कारण गर्मी व बरसात में बच्चों को काफी दिक्कत होती है । विद्यालय की चहारदीवारी भी नहीं है। शाम होते ही अराजक लोगों का अड्डा बन जाता है। रोज सुबह शराब की बोतलें परिसर में मिलती है। उन्हें उठाकर फेंका जाता है। फंड मिलने पर इसे ठीक कराया जाएगा, तब तक पंचायत स्तर पर बनी सामुदायिक शौचालय का उपयोग बच्चे कर रहे हैं पर पानी की व्यवस्था उसमें भी नहीं है। जिला प्रशासन बंद और जर्जर शौचालयों की मरम्मती और साफ-सफाई सुनिश्चित कराए : मुखिया संघ मुखिया संघ जिलाध्यक्ष भागीरथ मंडल और प्रखंड अध्यक्ष शब्बीर आलम ने कहा कि तत्कालीन उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने 14वीं वित्त मद से शौचालय की साफ-सफाई के लिए 9000 रुपए सालाना जारी किया था। जिसे बाद में बंद कर देने से साफ सफाई रुक गई और धीरे-धीरे शौचालय जर्जर और उपयोग लायक नहीं रहे। जिला प्रशासन इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए जिले भर के 1904 प्राथमिक विद्यालयों, 1073 मध्य और 181 उच्च व उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में बंद और जर्जर शौचालयों का मरम्मती कराते हुए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। केस स्टडी : 03. पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय गिरिडीह में पानी के अभाव में सूख रहे पौधे पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय गिरिडीह में दो डीप बोरिंग की गई थी। दोनों डीप बोरिंग फेल हो जाने से शौचालय तक पानी नहीं पहुंच पा रही है। पानी के अभाव में शौचालय का उपयोग नहीं होता है और परिसर में लगे पौधे भी सूख रहे हैं। प्राचार्य प्रवीर कुमार साह ने कहा कि कई बार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है। पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिला प्रशासन से अपील करते हैं कि स्कूल में पानी की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करें। केस स्टडी:02. जिला सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में डीप बोरिंग फेल हो जाने से टंकी में नहीं पहुंच रहा पानी डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस पचंबा में पानी की 10 टंकियां लगा कर शौचालय में कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है, मगर डीप बोरिंग फेल हो जाने से टंकी तक पानी ही नहीं पहुंच पाता है। प्राचार्य केशव कुमार ने कहा कि कई बार विभाग को आवेदन देकर पानी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई गई है, पर आज तक पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं हुई। बोरिंग से रोज मात्र दस मिनट पानी चलता है। गर्मी का सीजन आ रहा है पानी की व्यवस्था नहीं होने से पूरे स्कूल परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। विद्यालय में करीब 700 विद्यार्थी हैं।


